- ईरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन उसकी संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है और वह इससे पीछे नहीं हटेगा
- ईरान अमेरिका पर भरोसा कम जताता है और संदेह करता है कि अमेरिका नई बातचीत को गंभीरता से ले रहा है
- ईरान चीन और रूस से रणनीतिक सलाह मशविरा कर रहा है और बहुपक्षीय समर्थन के साथ आगे बढ़ रहा है
ईरान और अमेरिका के बीच फिर परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का दौर शुरू हो चुका, लेकिन इसके बावजूद टकराव की आशंका भी टली नहीं है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एकदम साफ शब्दों में कहा है कि ईरान किसी भी सूरत में यूरेनियम संवर्धन से पीछे नहीं हटेगा, भले ही उस पर युद्ध थोपा जाए. तेहरान में आयोजित एक फोरम में एएफपी से बातचीत करते हुए अराघची ने अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि वॉशिंगटन पर ईरान का भरोसा बेहद कम है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें संदेह है कि अमेरिका वास्तव में नई बातचीत को गंभीरता से ले रहा है या नहीं भी.
‘कोई हमारे व्यवहार को निर्देशित नहीं कर सकता'
ईरानी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि यूरेनियम संवर्धन पर ईरान का रुख उसकी संप्रभुता से जुड़ा हुआ मुद्दा है. हम यूरेनियम संवर्धन पर इतना जोर क्यों देते हैं और युद्ध की धमकी के बावजूद इसे छोड़ने से इनकार क्यों करते हैं? क्योंकि किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह हमारे व्यवहार को निर्देशित करे. अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को भी खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं है. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट करियर USS Abraham Lincoln अरब सागर में तैनात किया गया है.
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चीन और रूस से कर रहा है सलाह-मशविरा
अराघची ने यह भी बताया कि ईरान इस पूरे घटनाक्रम पर अपने रणनीतिक साझेदारों मुल्क चीन और रूस से लगातार सलाह-मशविरा कर रहा है. उनका कहना था कि ईरान अकेले नहीं बल्कि बहुपक्षीय समर्थन के साथ आगे बढ़ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ओमान में बातचीत फिर से शुरू हुई, जो पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिन के युद्ध के बाद पहली सीधी पहल है, उस संघर्ष में अमेरिका भी कुछ समय के लिए शामिल हुआ था. ईरान इस बातचीत के ज़रिए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म कराना चाहता है और बदले में, अराघची के मुताबिक, ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर “विश्वास बहाली के कुछ कदम” उठाने पर विचार कर सकता है.
परमाणु बम के आरोपों को ईरान ने नकारा
पश्चिमी देशों और इजरायल का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश में लगा हुआ है. हालांकि ईरान बार-बार इन आरोपों को खारिज करता रहा है. अराघची ने कहा कि वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम उसे बनाना ही नहीं चाहते। हमारा असली परमाणु बम यह ताकत है कि हम बड़ी शक्तियों को ‘ना' कह सकें.
इजरायल का कड़ा विरोध
इस बीच, इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया का सबसे चरमपंथी शासन सबसे खतरनाक हथियार हासिल करने की कोशिश कर रहा है. जो कि वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा है. इजरायल और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और क्षेत्रीय सशस्त्र गुटों को समर्थन देने जैसे मुद्दे भी शामिल हों. हालांकि ईरान इन विषयों को बातचीत में शामिल करने से पहले ही साफ इनकार कर चुका है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जो बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं, उन्होंने कहा है कि इन दोनों मुद्दों को किसी भी समझौते का हिस्सा बनना चाहिए.
‘शक्ति के ज़रिए शांति' का संदेश
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिका के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने शनिवार को USS Abraham Lincoln का दौरा किया. विटकॉफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह पोत और इसका स्ट्राइक ग्रुप हमें सुरक्षित रख रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप के ‘Peace Through Strength' यानी शक्ति के ज़रिए शांति के संदेश को कायम रखे हुए है.
बातचीत के बीच प्रतिबंध और टैरिफ
हालांकि बातचीत के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है. ओमान में पहले दौर की बातचीत के बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही गई. इसके अलावा अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के उद्देश्य से कई शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं. अरागची ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाइयों का जारी रहना इस बात पर संदेह पैदा करता है कि दूसरा पक्ष वास्तव में ईमानदारी से बातचीत करना चाहता है या नहीं. उन्होंने कहा कि ईरान हालात पर नजर बनाए हुए है और सभी संकेतों का आकलन करने के बाद ही बातचीत जारी रखने पर फैसला लिया जाएगा.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)












