इंडोनेशिया के समुद्र में एक मछुआरे के जाल में चीन का हाई-टेक जासूसी ड्रोन फंस गया. बाली और लोम्बोक के पास स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर यह चीनी अंडरवॉटर ड्रोन मिला है. यह इलाका ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहीं से पनडुब्बियां और बड़े नौसैनिक जहाज गुजरते हैं. मछुआरे ने जब इस 'टारपीडो' जैसी दिखने वाली वस्तु को देखा तो उसे कुछ गड़बड़ लगी. उसने तुरंत इसे किनारे पर खींच लिया और स्थानीय प्रशासन को सूचित किया. इसके बाद जब जांच शुरू हुई, तो जो सच सामने आया उसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए.
लोम्बोक स्ट्रेट में पैंतरेबाजी कर रहा चीन
जांच में पता चला कि यह बेलनाकार वस्तु लगभग 12 फीट (3.7 मीटर) लंबी और 0.7 मीटर चौड़ी है. साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट के मुताबिक, इस डिवाइस को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये'ऑब्जर्वेशन डिवाइस' या पानी के भीतर सर्वे करने वाले उपकरण जैसा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस उपकरण पर साफ तौर पर 'चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन' (CSIC) का लोगो लगा था.
ऑस्ट्रेलिया के लिए क्यों चिंता का विषय?
जिस जगह यह ड्रोन मिला वह लोम्बोक जलडमरूमध्य का इलाका है. ये इलाका ऑस्ट्रेलिया के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है. भविष्य में जब ऑस्ट्रेलिया को 'ऑकस' (AUKUS) समझौते के तहत परमाणु पनडुब्बियां मिलेंगी, तो वे इसी गहरे पानी के रास्ते का इस्तेमाल प्रशांत और हिंद महासागर के बीच आने-जाने के लिए करेंगी. ऐसे में वहां चीनी ड्रोन का पाया जाना सीधे तौर पर जासूसी की ओर इशारा करता है.
Photo Credit: Indonesian Police Handout
क्या इंडोनेशिया के साथ चीन का कोई विवाद भी है?
पुलिस ने प्राथमिक जांच में ड्रोन के भीतर किसी भी तरह के विस्फोटक या रेडियोधर्मी पदार्थ होने से इनकार किया है. हालांकि, इंडोनेशियाई प्रशासन इसे हल्के में नहीं ले रहा है. ड्रोन को अब लोम्बोक स्थित 'मतारम नेवल बेस' को सौंप दिया गया है.
फिर इसकी बारीकी से जांच की जाएगी कि इसने अब तक क्या डेटा जुटाया है. इंडोनेशिया का चीन के साथ सीधा क्षेत्रीय विवाद तो नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में नटुना द्वीप के पास चीनी जहाजों की घुसपैठ ने तनाव बढ़ा दिया है.
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