- भारत द्वारा चीनी निर्यात पर रोक लगाने से नेपाल में चीनी की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका पैदा हुई है
- नेपाल सरकार ने दावा किया है कि देश में पर्याप्त चीनी भंडार है जो अगले आठ महीने तक मांग पूरी करेगा
- नेपाल की घरेलू चीनी उत्पादन क्षमता कम होने के कारण वह अपनी जरूरतों के लिए भारत पर भारी निर्भर है
भारत द्वारा चीनी के निर्यात पर रोक लगाने के बाद नेपाल में घबराहट का माहौल बन गया है. नेपाल की बाजारों में लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में चीनी की कमी हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. क्योंकि नेपाल अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में चीनी भारत से मंगाता है, इसलिए भारत के इस फैसले ने वहां चिंता बढ़ा दी है. हालांकि नेपाल सरकार लगातार लोगों को भरोसा दिलाने में जुटी है कि फिलहाल डरने की जरूरत नहीं है. सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त चीनी का भंडार मौजूद है और अगले आठ महीने तक मांग पूरी करने लायक स्टॉक उपलब्ध है.
नेपाल सरकार ने अपनी जनता से क्या दावा किया है?
नेपाल सरकार ने दावा किया है कि भारत द्वारा चीनी के निर्यात पर रोक लगाने के बावजूद देश के बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं होगी. नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सरकारी व्यवस्था के पास अभी इतना चीनी भंडार मौजूद है कि अगले आठ महीने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है. मंत्रालय ने कहा, “व्यापारियों और चीनी उत्पादकों समेत सभी पक्षों के साथ हुई बैठक में उन्होंने भरोसा दिया है कि भारत की पाबंदी के बावजूद चीनी की आसान और नियमित सप्लाई जारी रखी जाएगी.”
दरअसल भारत ने 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगाने की घोषणा की है. घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. अब भारत सरकार के इस कदम के बाद नेपाली बाजार में चीनी की कमी होने की आशंका बढ़ गई है. माना जा रहा है कि इससे चीनी की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. नेपाल की घरेलू उत्पादन क्षमता कम होने के कारण वह अपनी जरूरत की चीनी के लिए बड़े पैमाने पर भारत पर निर्भर रहता है.
नेपाल में हर महीने औसतन 20 हजार से 25 हजार टन चीनी की जरूरत पड़ती है. वहीं दशैं, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मांग बढ़कर करीब 30 हजार टन तक पहुंच जाती है. मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक, निजी चीनी उद्योगों के पास मौजूद स्टॉक और सरकारी संस्थाओं जैसे फूड मैनेजमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड और साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास रखा चीनी भंडार मिलाकर अगले आठ महीने तक की मांग पूरी की जा सकती है. इसी आधार पर मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल चीनी की कोई कमी नहीं होगी.
इसके अलावा मंत्रालय ने कहा है कि कालाबाजारी, जमाखोरी और कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी रोकने के लिए निगरानी रखी जाएगी और स्पलाई को मैनेज किया जाएगा. इस रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरत चीनी जमा न करें, क्योंकि ऐसा करने से देशभर की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.













