ट्रंप के बाद अब चीन भी बोला- हमने कराई भारत-PAK में मध्यस्थता; जानें दावा क्यों हास्यास्पद

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि चीन ने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, भारत-पाकिस्तान तनाव, फलस्तीन-इजरायल और कंबोडिया-थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की.

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  • चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दावा किया कि भारत-पाकिस्तान तनाव सुलझाने में चीन ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई
  • उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मध्यस्थता का क्रेडिट लेने की दर्जनों बार कोशिश करते रहे हैं
  • भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की पहल पर सैन्य महानिदेशकों की बातचीत से युद्धविराम स्थापित किया था
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने का दावा अब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही करते रहे हैं. लेकिन अब चीन ने भी नया दावा करके श्रेय लेने की कोशिश की है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि साल 2025 में जिन प्रमुख विवादों में चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, उनमें भारत-पाकिस्तान के बीच का तनाव भी शामिल था. चीनी विदेश मंत्री वांग यी का यह दावा भारत सरकार के उस आधिकारिक रुख के बिल्कुल उलट है, जो हमेशा ही किसी भी तीसरे पक्ष के दखल को सिरे से खारिज करता रहा है.

चीन की 'शांति दूत' बनने की चाल

अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर बीजिंग में आयोजित एक संगोष्ठी में विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि इस साल दुनिया ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा सीमा पार संघर्ष और स्थानीय युद्ध देखे हैं. भूराजनैतिक उथलपुथल बढ़ रही है. उन्होंने आगे कहा कि चीन ने स्थायी शांति स्थापित करने के लिए वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया. 

चीनी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि हॉटस्पॉट मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इसी रुख का पालन करते हुए हमने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव, फलस्तीन और इजराइल के बीच मुद्दों और कंबोडिया-थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की. 

ट्रंप दर्जनों बार कर चुके हैं दावा

गौर करने की बात ये है कि अब तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल डोनाल्ड ट्रंप ही भारत-पाकिस्तान विवाद सुलझाने का 'क्रेडिट' लेने की कोशिश करते आए हैं. उन्होंने दर्जनों बार अलग-अलग मंचों से मध्यस्थता कराने की बात कही है. हाल ही में इजरायली पीएम नेतन्याहू से मुलाकात के बाद भी उन्होंने यही बात दोहराई. लेकिन इसका झूठा क्रेडिट लेने की होड़ में चीन भी उतर आया है. 

भारत-पाक सीजफायर की क्या है असलियत?

भारत मध्यस्थता कराने की बात को अब तक खारिज करता रहा है. भारत सरकार का साफ कहना है कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की पहल पर दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) की बातचीत में युद्धविराम पर सहमति बनी थी और उसी के बाद हमला रोका गया था. भारत हमेशा से कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच के सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इसमें अमेरिका या चीन जैसे किसी भी तीसरे देश की कोई जगह नहीं है.

चीन का दावा क्यों हास्यास्पद, जानें

भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने का चीन का दावा इसलिए भी हास्यास्पद है क्योंकि पूरी दुनिया जानती है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन के हथियारों का इस्तेमाल किया था. ऐसी भी खबरें आई थीं कि चीन ने उस वक्त अपने मित्र पाकिस्तान की हरसंभव मदद की थी. ऐसे में चीन का अब 'शांतिदूत' का मुखौटा ओढ़ना हैरान करने वाला है. 

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