'भारत किसी से भी तेल खरीदने को स्वतंत्र': भारत-अमेरिका की ट्रेड डील पर रूस का रिएक्शन

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हुई है. अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. रूस से भारत रोजाना 15 लाख से 20 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है. 

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India US Trade Deal
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  • रूस ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने में पूरी तरह स्वतंत्र है. यह कोई नई नीति नहीं है
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति दी, जिसे रूस ने खारिज किया
  • ग्लोबल एजेंसी केप्लर के अनुसार भारत अभी भी प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात कर रहा है
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नई दिल्ली:

भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर रूस का बड़ा रिएक्शन आया है. रूस ने कहा है कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने को स्वतंत्र है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड डील पर कहा था कि भारत रूस से तेल न खरीदने पर सहमत हो गया है. दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. मॉस्को की ओर से कहा गया कि सिर्फ रूस ही भारत को कच्चा तेल सप्लाई नहीं कर रहा है. भारत द्वारा कच्चे तेल के आयात के विकल्पों का दायरा बढ़ाने का फैसला कोई नया नहीं है. 

कच्चे तेल की सप्लाई पर नजर रखने वाली ग्लोबल एजेंसी केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है. नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जो भारत के कुल आयात का एक तिहाई से अधिक है.

भारत ने तेल खरीद का दायरा बढ़ाया

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी दावे पर कहा, हम और अन्य सभी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से सही तरीके से वाकिफ हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का एकमात्र आपूर्तिकर्ता नहीं है. भारत हमेशा से इन उत्पादों को अन्य देशों से खरीदता रहा है. इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नहीं दिखता. अमेरिकी ने दावा किया है कि भारत ने कच्चे तेल की खरीद रूस से अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से करने पर सहमति जताई है.

एक दिन पहले पेस्कोव ने कहा था कि रूस को भारत से रूसी तेल खरीद बंद करने के संबंध में कोई बयान नहीं मिला है. रूस के विदेश मंत्रालय ने भी इस बात पर जोर दिया कि हाइड्रोकार्बन व्यापार नई दिल्ली और मॉस्को दोनों के लिए लाभदायक है.

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कच्चे तेल के निर्यात पर रूस की सधी प्रतिक्रिया

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, हमें पूरा भरोसा है कि भारत द्वारा रूस से हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार है. हम भारत में अपने साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में घनिष्ठ सहयोग जारी रखने के लिए तैयार हैं. रूस के निजी रेडियो चैनल कोमर्सेंट एफएम ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल आयात रोकने से संबंधित किसी भी समझौते का उल्लेख नहीं किया.

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रूसी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता

भारत द्वारा 2021 तक कच्चे तेल के आयात में रूस का हिस्सा बमुश्किल 0.2 फीसदी था. हालांकि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद जब यूरोप और अन्य देशों ने रूस से संबंध तोड़ लिए तो दुनिया के तीसरा सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया.

भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा जो पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में बदला जाता है, वो दूसरे देशों से खरीदता है. इसमें से एक तिहाई आयात रूस से आता है. रिकॉर्ड स्तर पर भारत प्रतिदिन 20 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का आयात कर रहा था जो दिसंबर में घटकर लगभग 13 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया था. इस महीने भी यह स्थिर रहने की संभावना है.

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अमेरिका का 50 फीसदी टैरिफ

पिछले साल ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ में से एक है. इसमें रूसी से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क शामिल था. रियल-टाइम एनालिटिक्स कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है. यह पिछले महीने के औसत 12.1 लाख बैरल प्रति दिन और 2025 के बीच 20 बैरल प्रति दिन से अधिक के आयात से कम है.
 

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