- भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रमजान के महीने में अफगानिस्तान पर हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है
- इन हमलों में 185 निर्दोष नागरिक मारे गए, जिनमें से लगभग पचपन प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं
- भारत ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमले करने के लिए करता है
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के अंदर पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की निंदा की है और कहा है कि रमजान के महीने में ऐसे हमले करना पाखंड है. इन हमलों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे मारे गए, जबकि पाकिस्तान “इस्लामी एकजुटता” की बात करता है. UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार को UN सुरक्षा परिषद में कहा, “एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की ऊंची बातें करना और दूसरी तरफ पवित्र रमजान के महीने में बेरहमी से हवाई हमले करना पाखंड है.”
उन्होंने कहा कि इन हमलों में 6 मार्च 2026 तक 185 निर्दोष नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं. उन्होंने कहा, “भारत अफगानिस्तान की जमीन पर किए गए इन हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है. ये अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और किसी देश की संप्रभुता के सिद्धांत का साफ उल्लंघन हैं.”
उन्होंने कहा, “आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से ही ISIS (इस्लामिक स्टेट), अल-कायदा, उनके सहयोगी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, और लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट, और इनके मददगारों को सीमा पार आतंकवाद करने से रोका जा सकता है.”
हाल ही में सीमा पार हुए एक बड़े हमले में द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अप्रैल में पहलगाम में धार्मिक वजह से आतंकवादी हमला किया, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की अफगानिस्तान के लिए उप विशेष प्रतिनिधि जॉर्जेट गैगनॉन ने कहा, “पाकिस्तान के साथ संघर्ष की वजह से इंसानों और अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान हुआ है.” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी सीमा बंद कर दी है. अब व्यापार का एकमात्र रास्ता ईरान के जरिए बचा है, लेकिन वहां भी युद्ध के कारण दिक्कतें आ रही हैं. इससे जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने लगी हैं और अफगानिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ रहा है.
उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान की दो सबसे लंबी सीमाओं पर बढ़ती अस्थिरता पूरे देश की स्थिरता को कमजोर कर रही है.”













