IAF के एफ-35I “अदिर” ने ईरानी वायु सेना के याक-130 लड़ाकू विमान को मार गिराया

28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के बड़े हवाई हमले के जवाब में खाड़ी के उन देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जहां अमेरिकी सैनिक और उसके सैन्य अड्डे मौजूद हैं.

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  • ईरान और इजरायल के बीच जारी हवाई हमलों के कारण क्षेत्रीय तनाव और युद्ध की स्थिति बनी हुई है
  • IAF के एफ-तीस पांच आई लड़ाकू विमान ने ईरानी याक-एक सौ तीस विमान को मार गिराया है
  • युद्ध के बढ़ने से अमेरिका के एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या और क्षमता पर चिंता जताई जा रही है
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ईरान और इजरायल के बीच बीते कुछ दिनों से जारी हवाई हमले कब रुकेंगे ये किसी को नहीं पता. ईरान अपने सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इस युद्ध में पीछे मुड़कर देखने को तैयार नहीं दिख रहा है. उधर, ट्रंप ने तो खुद कह दिया है कि जब तक ये युद्ध करना पड़े वो करेंगे. इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अब खबर आ रही है कि IAF के एफ-35I “अदिर” लड़ाकू विमान ने ईरानी वायु सेना के याक-130 लड़ाकू विमान को मार गिराया. यह एफ-35 “अदिर” लड़ाकू विमान द्वारा मानवयुक्त लड़ाकू विमान को मार गिराने का इतिहास का पहला मामला है. 

आपको बता दें कि अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग लगातार जारी है. युद्ध को शुरू हुए 4 दिन हो चुके हैं और अब बात हथियारों के जखीरे की हो रही है. सैन्य ताकत की हो रही है. अब तक अमेरिकी सेनाओं ने पिछले कुछ दिनों में ईरान की सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को गिराया है. लेकिन इससे यह सवाल उठ रहा है कि अगर यह युद्ध कई हफ्तों तक चलता रहा तो अमेरिका के पास एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें कितने समय तक बचेंगी. ईरान ने शनिवार, 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के बड़े हवाई हमले के जवाब में खाड़ी के उन देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जहां अमेरिकी सैनिक और उसके सैन्य अड्डे मौजूद हैं.

न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा था कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है जो अमेरिकी सेनाओं, उनके पार्टनर देशों और क्षेत्रीय स्थिरता को निशाना बना रही थीं. यह तो सही है कि इन मिसाइलों को रोकना एक सफलता है क्योंकि इससे वे अपने लक्ष्य पर नहीं गिर पाईं. लेकिन इसकी कीमत भी है, क्योंकि इन्हें रोकने के लिए महंगी और आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करनी पड़ती हैं, जिनकी संख्या सीमित है.

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