अमेरिका- ईरान में कैसे रुकी जंग? डेडलाइन खत्म होने वाली थी और आखिरी समय में चीन ने कमाल कर दिया

US Iran Ceasefire for 2 Weeks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर डील में पाकिस्तान ने बिचौलिए की भूमिका निभाई है लेकिन एक देश ऐसा भी था जिसने अगर ईरान को नहीं मनाया होता तो यह डील नहीं हो पाती- वो चीन है.

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US Iran Ceasefire for 2 Weeks: अमेरिका और ईरान के बीच की जंग 2 हफ्तों के लिए रुकी

US Iran Ceasefire for 2 Weeks: आखिरकार मिडिल ईस्ट में फिर से स्थाई शांति आने की उम्मीद जग गई है. अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, दोनों की तरफ से इसका ऐलान हो चुका है. यह फैसला उस समय हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को पूरी तरह नष्ट करने के लिए दी गई डेडलाइन खत्म होने में सिर्फ लगभग एक घंटा बाकी था. इस समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा. अमेरिका और इज़राइल की तरफ से एक महीने से ज्यादा समय तक हुए तेज हमलों के बाद, ईरान ने कहा कि वह वॉशिंगटन के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हो गया है. यह बातचीत शुक्रवार से पाकिस्तान में शुरू होगी, जिसका उद्देश्य इस संघर्ष को खत्म करने का रास्ता ढूंढना है.

इस सीजफायर डील में पाकिस्तान ने बिचौलिए की भूमिका निभाई है लेकिन एक देश ऐसा भी था जिसने अगर ईरान को नहीं मनाया होता तो यह डील नहीं हो पाती.

आखिरी समय में चीन ने ईरान को मनाया

न्यूयॉर्क टाइम्स ने तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है. इसके अनुसार ईरान ने पाकिस्तान के दो हफ्ते के युद्ध-विराम प्रस्ताव को आखिरी समय में चीन के हस्तक्षेप के बाद स्वीकार किया. चीन ईरान का महत्वपूर्ण सहयोगी है. चीन ने ईरान ने लचीलापन दिखाने और तनाव कम करने के लिए कहा. महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान से आर्थिक तबाही के बारे में बढ़ती चिंताओं के बीच ईरान ने पाकिस्तान के दो सप्ताह के संघर्ष विराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम को नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने मंजूरी दे दी है.

आगे क्या होगा?

अब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होनी है. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि उसने युद्ध में दो सप्ताह के युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है. इसके बयान में कहा गया है कि वह शुक्रवार यानी 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत करेगा. 
हालांकि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की तरफ से यह भी कहा गया कि वार्ता युद्ध के अंत का संकेत नहीं देती.

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