6 करोड़ आबादी और 'जिरगा' का दबदबा, जानिए कितने ताकतवर हैं पश्तून, जिन्होंने लिया पाक-अफगान युद्ध रुकवाने का जिम्मा

पाक-अफगान सीमा पर जारी खूनी संघर्ष को रोकने के लिए पश्तूनों जिरगा बुलाई है. आखिर पश्तून कितने ताकतवर हैं और जिरगा क्या होती है, जिसके सहारे युद्ध रोकने की कोशिश होगी.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
पाकिस्तान अफगानिस्तान जंग रुकवाने के लिए पश्तून करेंगे जिरगा
AI Image
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर जारी संघर्ष में पश्तून समुदाय ने शांति स्थापित करने की पहल की है
  • दोनों देशों के पश्तूनों ने 31 मार्च को पाक-अफगान पीस जिरगा बुलाकर युद्ध रोकने की कोशिश की है
  • डूरंड लाइन पर बसे पश्तून परिवारों को इस संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है और वे दोनों देशों से कट गए हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग जारी है. डूरंड लाइन पर लगातार दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. इस बीच जंग को रोकने के लिए पश्तून समुदाय आगे आया है. दुनिया के सबसे बड़े जनजातीय समाज माने जाने वाले पश्तूनों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति स्थापित करने का जिम्मा उठाया है. पश्तून समुदाय ही इस जंग की सबसे भारी कीमत चुका रहा है. सरहद के दोनों ओर फैले पश्तूनों ने जंग रोकने के लिए 31 मार्च को 'पाक-अफगान पीस जिरगा' बुलाने का ऐलान किया है. इस जिरगा में पश्तून बुजुर्ग, राजनीतिक नेता और धार्मिक विद्वान शामिल होंगे. जिरगा के जरिए पश्तून अफगान और पाक के बीच छिड़ी जंग को रोकने की मांग करेंगे और रोडमैप तैयार करेंगे.

पश्तूनों ने क्यों उठाया जंग रोकने का बीड़ा?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच फरवरी महीने से ही संघर्ष जारी है. दोनों देशों के बीच हवाई हमले हुए हैं. इस लड़ाई का सबसे ज्यादा खामियाजा पश्तून समुदाय को भुगतना पड़ रहा है. दरअसल डूरंड लाइन यानी पाक-अफगान बॉर्डर दोनों देशों के पश्तून बहुल इलाकों को काटती है. खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान के उत्तरी हिस्सों और अफगानिस्तान के नंगरहार, पकतिका, खोस्त जैसे प्रदेशों में पश्तून परिवार बंटे हुए हैं. सीमा के दोनों ओर पश्तून आबादी है. ऐसे में जब दोनों देशों की सेनाएं टकराती हैं, तो बम और गोलियां पश्तूनों के घरों, बाजारों और स्कूलों पर गिरते हैं. सीमा बंद होने से उनका कारोबार बंद हो जाता है. पश्तून अपनों से ही कट जाते हैं. यही वजह है कि अब पश्तून समाज ने तय किया है कि वे इस्लामाबाद और काबुल की इस लड़ाई को रोकेंगे.

कितने पावरफुल हैं पश्तून?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर पश्तून कितने ताकतवर हैं, जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान की लड़ाई तक रोकने की पावर रखते हैं. दरअसल पश्तून दुनिया की सबसे बड़ी ट्राइबल कम्युनिटी है. दुनिया भर में पश्तूनों की कुल आबादी करीब 6 करोड़ से 7 करोड़ है. पाकिस्तान की कुल आबादी का लगभग 15.4% यानी करीब 3.9 करोड़ हिस्सा पश्तून है. ये खैबर पख्तूनख्वा और उत्तरी बलूचिस्तान में बसते हैं. पाकिस्तान के साथ ही पश्तूनों का अफगानिस्तान में भी काफी दबदबा है. अफगानिस्तान में पश्तून सबसे बड़ा जातीय समूह है. अफगानिस्तान की कुल आबादी में इनकी हिस्सेदारी 42% से 60% के बीच है. यानी लगभग 1.8 करोड़ से 2.6 करोड़ के बीच पश्तून वहां रहते हैं. मौजूदा तालिबान सत्ता के शीर्ष नेता से लेकर जमीनी लड़ाकों तक में पश्तूनों का ही वर्चस्व है. यही वजह है कि पश्तून दोनों देशों में काफी ताकत रखते हैं.

pakistan afganistan war

यह भी पढ़ें: हूती अमेरिकी‑इजरायली जहाजों को बना सकते हैं निशाना, बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट क्यों नहीं खतरे से खाली

क्या होती है जिरगा?

पश्तूनों की यह जिरगा भारत की खाप पंचायतों जैसा ही पुराना सिस्टम है, जो सदियों से चला आ रहा है. भारत में खाप पंचायतें जहां स्थानीय सामाजिक मुद्दों तक ही सीमित रहती हैं, वहीं पश्तून जिरगा सदियों से युद्ध-विराम, विवाद सुलझाने और यहां तक कि राज्य स्तर के फैसलों में भूमिका निभाती रही है. कहा जा सकता है कि जिरगा में दो कानून और नियम बनाए जाते हैं, वो पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों देशों में ही माने जाते हैं. पश्तून 'पश्तूनवाली' नाम के एक अलिखित संविधान को मानते हैं. जिरगा में ही सभी नियम कायदे बनाए जाते हैं. जिरगा का फैसला अंतिम माना जाता है. यही वजह है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरकारें भी जिरगा के फैसलों को नजरअंदाज नहीं कर पाते. 

Advertisement

ये भी पढ़ें :होर्मुज की 'आग' लाल सागर तक पहुंची, हूती विद्रोही जहाजों को बना सकते हैं मिसाइल-ड्रोन से निशाना, अमेरिका का अलर्ट

क्या जिरगा के बाद रुक जाएगी पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग?

पश्तूनों ने 31 मार्च को जो जिरगा बुलाई है उसमें दोनों देशों से कई कबीलाई नेता, राजनीतिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल होंगे. ये लोग मिलकर इस संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे. जिरगा में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी. जिरगा से निकलने वाला शांति प्रस्ताव दोनों देशों के लिए चेतावनी और समाधान दोनों को काम करेगा. अब देखना होगा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान पश्तूनों की इस जिरगा के फैसलों को मानते हैं या नहीं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ईरान की जमीन पर जंग, दोनों तरफ से तैयारी प्रचंड... अब होगा आर-पार का फैसला

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Iran Israel War: ईरान की गोलीबारी, भारत का गुस्सा भारी! |Bharat Ki Baat Batata Hoon