क्या युद्ध के मैदान में चीन की आंख से देख रहा है ईरान,हमले से पहले वायरल हुई तस्वीरों में क्या था

ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के 'ऑपरेशन एपिक प्यूरी' से पहले ही इंटरनेट पर ऐसी तस्वीरें वायरल होने लगी थीं, जिनमें दिखाया गया था कि अरब देशों में अमेरिकी सैन्य तैनाती कहां कहां है और कैसी है. आइए हम आपको बताते हैं कि किसने जारी की थीं ये तस्वीरें.

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नई दिल्ली:

फरवरी के अंतिम हफ्ते में जब पहली मिसाइल भी नहीं दागी गई थी और लोगों ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का नाम भी नहीं सुना था, तब इंटरनेट पर कुछ सैटेलाइट तस्वीरें वायरल हो रही थीं. इन तस्वीरों में रनवे पर खड़े विमान, रेगिस्तानी एयरफील्ड पर उतरते ट्रांसपोर्ट प्लेन और भूमध्य सागर में कहीं विमानवाहक पोत के डेक पर खड़े लड़ाकू विमान दिखाई दे रहे थे. इन तस्वीरों की खास बात यह थी कि उनमें असामान्य स्तर की जानकारी दी गई थी. यह जानकारी अंग्रेजी में नहीं बल्कि मंदारिन (चीनी भाषा) में थी. इनमें विमानों के प्रकार बताए गए थे, मिसाइल रक्षा प्रणालियों की पहचान की गई थी और सैनिकों की तैनाती को सटीक जगह (Geolocation) के साथ दिखाया गया था.

एक सेट की तस्वीरों में लॉकहिड मार्टिन एफ‑22 स्टील्थ लड़ाकू विमान इजरायल के ओवैद एयर बेस के रनवे पर खड़े दिखाई दिए. वहीं दूसरी तस्वीर में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पर विमानों और सैन्य सहायता प्रणालियों की बढ़ती तैनाती दिखाई गई थी. अन्य तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का नक्शा दिखाया गया था.

ये तस्वीरें एक चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनी ने ऑनलाइन शेयर की थीं. इस कंपनी में 200 से भी कम कर्मचारी काम करते हैं. इसके कुछ दिन बाद ही युद्ध शुरू हो गया. अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू किया. यह ईरान को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों का एक अभियान था. इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. इस युद्ध के समानांतर एक और घटना घट रही थी. इंटरनेट पर सैटेलाइट तस्वीरें फैल रही थीं. इन तस्वीरों में अमेरिकी विमान, मिसाइल रक्षा प्रणाली और नौसैनिक तैनाती दिखाई जा रही थी. इन तस्वीरों का स्रोत वही कंपनी थी, जिसका जिक्र हमने ऊपर किया है. शंघाई की इस कंपनी का नाम है, MizarVision.

तस्वीरों में क्या नजर आया

इस तरह की तस्वीरों का पहला सेट कथित तौर पर 20 फरवरी को सामने आया. MizarVision ने हाई रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों का एक संग्रह पब्लिश किया था. इन तस्वीरों में दक्षिणी इजरायल के ओवैद एयर बेस पर अमेरिकी विमानों की तैनाती, मध्य-पूर्व में सऊदी अरब और कतर समेत कई जगहों पर लड़ाकू विमानों की गतिविधियां, अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियां और विमानवाहक पोतों की आवाजाही दिखाई गई थी.इनमें से हर तस्वीर को एआई टूल की मदद से चिन्हित किया गया था.इनमें विमानों के प्रकार बताए गए थे, सहायक विमानों की पहचान की गई थी और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को हाइलाइट किया गया था.

एक मार्च तक ऐसी तस्वीरों की संख्या काफी बढ़ चुकी थी. कंपनी ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के सैन्य ठिकानों से जुड़ी अतिरिक्त तस्वीरें जारी कीं. इनमें विमान के प्रकार, एयर डिफेंस सिस्टम और सैनिकों की तैनाती का विवरण दिया गया था.इन तस्वीरों को भू-स्थानिक जानकारी के साथ एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और चीनी नेटवर्क Weibo पर शेयर किया गया था. इनमें से कुछ पोस्ट को चीनी सरकारी मीडिया से जुड़े एकाउंट और चीनी सेना से जुड़े विश्लेषकों ने भी शेयर किए थे. 

27 फरवरी की इस तस्वीर में अल ओवैदा एयर बेस पर अमेरिकी वायु सेना के 11 एफ-22 लड़ाकू विमान दिखाए गए हैं.

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अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म की पहचान बताने वाली तस्वीरें

इन तस्वीरों में कई महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म की पहचान की गई.इन सैटेलाइट तस्वीरों में लॉकहिड मार्टिन एफ‑22 स्टील्थ लड़ाकू विमान युद्ध शुरू होने से ठीक पहले ओवैद एयर बेस पर खड़े दिखाई दिए. तस्वीरों के मुताबिक सात एफ-22 विमान टार्मैक पर खड़े थे और चार अतिरिक्त विमान रनवे पर देखे गए.

इसके करीब 24 घंटे बाद ही 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू हो गया. 

अन्य तस्वीरों मेंी  प्रिंस सुल्तान एयर बेस की गतिविधियां दिखाई गईं.वहां सात बोइंग ई-3 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान और दो  बॉम्बार्डियर ई-11ए कम्युनिकेशन विमान तैनात थे. कतर के अल उनैद एयर बेस की भी तस्वीरें सामने आईं. यह बेस बाद में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बना. ये तस्वीरें केवल एयरफील्ड तक सीमित नहीं रहीं. 

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अंतरिक्ष से विमानवाहक पोत की निगरानी

नौसैनिक गतिविधियों की भी निगरानी की गई. MizarVision ने सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं. इनमें अमेरिकी नौसेना का सबसे नया विमानवाहक पोत यूएसएस ग्रेल्ड आर फोर्ड ग्रीस को क्रेट द्वीप के सूदा बे नेवल बेस से निकले के बाद दिखाया गया. 

इन तस्वीरों में पोत के डेक पर बोइंग एफ/ए-18ई/एफ सुपर हार्नेट लड़ाकू विमान और नार्थरोप गुरमान ई-2डी हॉकआई एयरबोर्न अर्ली वार्निंग विमान भी दिखाई दिए. एक दूसरी तस्वीर में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राह्म लिंकन (CVN‑72) को ओमान के पास अरब सागर में एक सप्लाई जहाज से मिलने जाता हुआ दिखाई दिया.कंपनी ने इन सैटेलाइट तस्वीरों को ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के साथ भी जोड़ा.

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27 फरवरी को जारी इस तस्वीर में उदैद एयर बेस पर एक केसी-135, दो सी-130 और करीब सात लड़ाकू हेलिकॉप्टर को देखा जा सकता है.

विश्लेषकों ने विमान ट्रैकिंग टूल का इस्तेमाल कर समुद्री निगरानी विमान बोइंग पी-8ए  की उड़ान को ट्रैक किया. यह विमान बहरीन के इसा एयर बेस से उड़कर अरब सागर की ओर गया. जहां माना जा रहा था कि यूएसएस अब्राह्म लिंकन (CVN‑72) का कैरियर ग्रुप मौजूद है.

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इन तस्वीरों के पीछे की कंपनी

अमेरिकी कंपनियों जैसे मैक्सर इंटेलीजेंस (जिसे पहले Vantor कहा जाता था) या प्लैनेट लैब्स के विपरीत, जो अपने सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं, MizarVision मुख्य रूप से विश्लेषण और डेटा प्रोसेसिंग कंपनी है.विश्लेषकों के अनुसार इसकी भूमिका सूचना एकत्र करने वाले प्लेटफॉर्म (Information Aggregator) जैसी है.यह कंपनी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से डेटा एकत्र करती है, जैसे- व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरें,
ADS-B विमान ट्रैकिंग सिग्नल, AIS शिप ट्रैकिंग डेटा. इन स्रोतों से मिले डेटा को ऐसे एआई मॉडल से प्रॉसेस किया जाता है, जो सैन्य उपकरणों की खुद ही पहचान करने में सक्षम होते हैं. 

इस सैटेलाइट इमेज में सुंदा बे नेवल बेस से अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस फोर्ड को आगे बढता हुआ देखा जा सकता है.

इस तरह तैयार होने वाला डेटा भू-स्थानिक खुफिया जानकारी जैसा होता है, ठीक वैसा ही काम जो पहले केवल राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां ही करती थीं. इस वजह से कुछ विश्लेषकों ने इसे 'खुफिया दुनिया का ब्लूमबर्ग' कहा है.

चीनी कंपनी को सैटेलाइट डेटा कहां से मिला 

इन तस्वीरों का दो स्रोत हो सकते हैं. इनमें से पहला है चीन का Jilin‑1 Satellite Constellation नेटवर्क.इसे Chang Guang Satellite Technology नाम की कंपनी संचालित करती है.Jilin‑1 के नेटवर्क में पृथ्वी पर नजर रखने वाली 100 से अधिक सैटेलाइट हैं. इनमें से कई बहुत अधिक हाई रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें ले सकते हैं. ये तस्वीरें इतनी साफ होती हैं कि रनवे पर खड़े विमान और अलग-अलग मिसाइल रक्षा प्रणालियों की पहचान की जा सकती है.

इन तस्वीरों का दूसरा स्रोत पश्चिमी व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनियां भी हो सकती हैं, जैसे- Maxar Intelligence, Planet Labs, Airbus Defence और Space. ये कंपनियां अपनी सैटेलाइट तस्वीरें दुनिया भर के ग्राहकों को व्यावसायिक तौर पर बेचती हैं.

इस सैटेलाइट इमेज में तेहरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले में तबाह हुई इमारतों को देखा जा सकता है.

क्या ईरान ने इन तस्वीरों का इस्तेमाल हमले में किया?

इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि ईरान ने इन तस्वीरों का इस्तेमाल अपने हमलों को तय करने के लिए किया. लेकिन जिन कई सैन्य ठिकानों को MizarVision की पोस्ट में पहले दिखाया गया था, बाद में उन पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले हुए. इनमें कतर का अल उदैद एयर बेस भी शामिल है. ईरान ने जॉर्डन में   मुआफक साल्टी एयर बेस को भी निशाना बनाया, जहां लगा अमेरिकी थॉड मिसाइल रक्षा प्रणाली का करीब 30 करोड़ डॉलर मूल्य का AN/TPY‑2 रडार सिस्टम नष्ट हो गया. बाद में आईं सैटेलाइट तस्वीरों से इस रडार सिस्टम के नष्ट होने की पुष्टि हुई.

यह रडार खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल रक्षा प्रणाली को निर्देशित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण था. इसके नष्ट होने के बाद रक्षा का बोझ MIM‑104 Patriot Missile System पर ज्यादा आ गया, जो PAC-3 इंटरसेप्टर पर निर्भर करता है, जिनकी संख्या पहले से ही कम है. 

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