अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग को एक महीना होने जा रहा है. इस जंग ने पूरी दुनिया को हलकान कर रखा है. एनडीटीवी के लिए तेहरान से यूसुफ जलाली ने स्पेशल रिपोर्ट पेश करते हुए न सिर्फ हालात बयां किए बल्कि इस जंग को रोकने के लिए पर्दे के पीछे चल रही कोशिशों का भी विस्तार से ब्योरा दिया. किसी भारतीय टीवी चैनल के लिए तेहरान से यह पहली रिपोर्टिंग है.
जंग के बीच उम्मीद की किरण
भीषण हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए रोकने का जैसे ही ऐलान किया, युद्ध की विभीषिका झेल रही दुनिया को उम्मीद की एक किरण नजर आई. हालांकि इसके बावजूद ईरान और इजरायल के एकदूसरे पर लगातार हमलों ने इस उम्मीद पर सवाल खड़े कर दिए. ये सवाल भी तैरने लगा कि हमले रोकने की घोषणा ट्रंप की कोई कूटनीतिक चाल है या फिर वाकई वह जंग की आग को ठंडा करना चाहते हैं.
युद्ध से बड़े पैमाने पर तबाही
ट्रंप के ऐलान के बाद भी ईरान के सैन्य ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल अड्डे और नेवी पर हमले लगातार जारी रहे. साफ हो गया कि हमले रोकने की घोषणा सिर्फ ईरान के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर तक सीमित है. इस युद्ध ने बड़े पैमाने पर मानवीय तबाही भी मचाई है. पूरे पश्चिम एशिया में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. अकेले ईरान में ही अनुमानित 1200 लोगों की मौत हो चुकी है.
ट्रंप के पहल और शांति के प्रयास
ट्रंप का ईरान से वार्ता की पहल करना इस लंबी खिंच रही जंग के अंत की एक शुरुआत कही जा सकती है. लेकिन ये सब हुआ कैसे, इस पहल के पीछे कौन कौन हैं? ये जानना दिलचस्प है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई देश और कई प्रमुख नेता इस जंग की आग को भड़कने से रोकने के लिए सक्रिय हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि 19 मार्च को इजिप्ट, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की रियाद में बैठक हुई थी.
IRGC से वार्ता का रास्ता खुला
इस बैठक से तनाव घटाने के लिए संयुक्त प्रयासों के संकेत दिए गए. लेकिन समस्या ये है कि अयातुल्ला अली खामेनेई और अली लारिजानी जैसे नेताओं की मौत के बाद ईरान में कोई ऐसा शख्स नहीं दिख रहा, जिससे सीधी बात की जा सके. इस बीच इजिप्ट ने दावा किया कि उसने ईरान की पावरफुल रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर से वार्ता का चैनल खोलने में कामयाबी हासिल की है.
तेज होती जंग और अमेरिका की चिंता
संभवतः इसी का नतीजा है कि 23 मार्च के ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव देखा गया है. वह पहले जहां हमले तेज करने की धमकी दे रहे थे, अब उन्हें रोकने की बात करने लगे. रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप के इस बदले रुख के पीछे वॉशिंगटन में जंग को बड़े युद्ध में बदलने से रोकने की बढ़ती मंशा भी है.
राष्ट्रपति के पूर्व सलाहकार जेरार्ड कुशनर और स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ इस वार्ता प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पहल कर रहे हैं. ईरान से अमेरिका का सीधा संपर्क भले ही नहीं हो सका है, लेकिन बिचौलियों के माध्यम से प्रयास जारी हैं. उम्मीद है कि ये प्रयास रंग लाएंगे और युद्ध की आग शांत हो सकेगी. ये जितनी जल्दी होगा, दुनिया उतनी जल्दी राहत की सांस ले सकेगी.
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