ट्रंप को पसंद आया 'गाजा शांति प्लान' पर PM मोदी का पोस्ट, जानिए भारत ने क्या स्टैंड लिया है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20 सूत्रीय गाजा शांति योजना के तहत, गाजा एक 'कट्टरपंथ-मुक्त, आतंकवाद-मुक्त क्षेत्र होगा, जो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करेगा.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
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  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की गाजा संघर्ष समाप्ति योजना का सोशल मीडिया पर स्वागत किया था
  • ट्रंप की योजना में गाजा में युद्ध तुरंत खत्म करने, बंधकों की रिहाई और गाजा का असैन्यीकरण प्रस्तावित है
  • गाजा में इजरायली हमलों से हजारों फिलिस्तीनी मारे गए और क्षेत्र में गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा संघर्ष को समाप्त कराने संबंधी योजना का मंगलवार को स्वागत किया था. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि यह फलस्तीन और इजरायल के लोगों के साथ-साथ पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक शांति, सुरक्षा और विकास का जरिया बनेगी. मोदी ने आशा व्यक्त की कि 'सभी संबंधित पक्ष' संघर्ष खत्म करने तथा शांति सुनिश्चित करने के लिए ट्रंप की पहल का समर्थन करेंगे. अब पीएम मोदी के इस पोस्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति ने रिपोस्ट किया है.

पीएम मोदी ने क्या कहा था?

ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वार्ता के बाद प्रस्तुत की गई इस योजना में गाजा में युद्ध तत्काल खत्म करने, हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा करने और गाजा के असैन्यीकरण का प्रस्ताव है. पीएम मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'हम गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए घोषित राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप की व्यापक योजना का स्वागत करते हैं.'

उन्होंने कहा, 'यह फलस्तीनी और इजरायली लोगों के साथ-साथ पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक शांति, सुरक्षा और विकास का जरिया बनेगी. हम आशा करते हैं कि सभी संबंधित पक्ष राष्ट्रपति ट्रंप की पहल के लिए एकजुट होंगे और संघर्ष को समाप्त करने तथा शांति सुनिश्चित करने के इस प्रयास का समर्थन करेंगे.”

हमास ने अब तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. आठ मुस्लिम बहुल देशों और फलस्तीनी प्राधिकरण ने इस योजना का स्वागत किया है.

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बता दें कि 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायली शहरों पर हमास के हमला करने और लगभग 1,200 लोगों की हत्या के बाद इजरायल ने गाजा पर हमले शुरू किए थे. हमास ने 251 लोगों को बंधक भी बना लिया था और उनमें से 50 से ज़्यादा अब भी उसकी गिरफ्त में हैं. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, तब से इजरायली हमलों में 66,000 से ज़्यादा फिलस्तीनी मारे गए हैं.

भोजन और दवाओं की कमी के कारण गाजा एक बड़े मानवीय संकट से जूझ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले महीने कहा था कि गाजा में कुपोषण की दर 'खतरनाक स्तर' पर पहुंच गई है. चीन के साथ-साथ कई यूरोपीय देशों ने भी गाजा के लिए ट्रंप की शांति योजना का स्वागत किया है. योजना की घोषणा के कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने कहा कि वह हमास को इस योजना पर प्रतिक्रिया देने के लिए तीन से चार दिन का समय दे रहे हैं.

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ट्रंप की योजना क्या है?

योजना के तहत, गाजा एक 'कट्टरपंथ-मुक्त, आतंकवाद-मुक्त क्षेत्र होगा, जो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करेगा.” योजना के तहत गाजा का पुनर्विकास किया जाएगा. यदि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाते हैं, तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा. बंधकों की रिहाई की तैयारी के लिए इजरायली सेनाएं वापस लौट जाएंगी.

इस दौरान हमले रोक दिए जाएंगे. सभी बंधकों की रिहाई के बाद, इजरायल आजीवन कारावास की सजा पाए 250 कैदियों और सात अक्टूबर, 2023 के आतंकवादी हमले के बाद हिरासत में लिए गए 1,700 गाजावासियों को रिहा कर देगा. योजना के अनुसार, एक अस्थायी शासी बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष ट्रंप होंगे और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर सदस्य होंगे.

भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ट्रंप की शांति योजना के तहत भारत जैसे देशों को क्षेत्र में पुनर्निर्माण कार्यों की अनुमति दी जाएगी, क्योंकि भारत पश्चिम एशिया में शांति के लिए सकारात्मक भूमिका निभा रहा है. राजदूत ने शांति योजना पर मोदी की प्रतिक्रिया का भी स्वागत किया है. उन्होंने कहा, 'हम प्रधानमंत्री मोदी के बयान का स्वागत करते हैं. भारत इस क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभाता है और हम इसका स्वागत करेंगे.'

इजरायली राजदूत ने कहा कि भारत गाजा में आर्थिक परियोजनाओं में योगदान दे सकता है और इजरायल भी गाज़ा में निर्माण गतिविधियों में अपनी भागीदारी चाहेगा. उन्होंने कहा, 'हम भारत सरकार के बहुत आभारी हैं. भारत हमारे क्षेत्र में शांति बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है. आर्थिक गतिविधियों के मामले में भारत के पास देने के लिए बहुत कुछ है.'

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यह पूछे जाने पर कि क्या शांति योजना को अंतिम रूप दिए जाने से पहले भारत को इसकी जानकारी दी गई थी, तो अजार ने पत्रकारों से कहा कि वह यह नहीं जानते, लेकिन कई देशों को इस कदम के बारे में अनौपचारिक रूप से सूचित किया गया था.

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