- अमेरिका के राष्ट्रपति को वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मेडल सौंप दिया है
- नोबेल समिति ने स्पष्ट किया है कि पुरस्कार को न तो बदला जा सकता है और न ही किसी और को ट्रांसफर किया जा सकता है
- व्हाइट हाउस के कम्यूनिकेशन डॉयरेक्टर ने कहा मेडल न दें लेकिन ट्रंप की शांति की कोशिशों को हाईलाइट करें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम हथकंडों के बाद आखिरकार हारकर भी शांति के नोबेल पुरस्कार वाले मेडल को अपने हाथ में ले लिया है. 2025 के लिए इन पुरस्कार को जीतने वाली वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने ट्रंप को यह मेडल सौंप दिया है. हालांकि नॉर्वे की नोबेल समिति का कहना है कि एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इसे न तो बदला जा सकता है और न ही किसी और के नाम किया जा सकता है. भले ही मेडल अपना मालिक बदल ले. अब व्हाइट हाउस के कम्यूनिकेशन डॉयरेक्टर स्टीवन चेउंग ने रविवार, 19 जनवरी को कहा कि अगर नोबेल फाउंडेशन डोनाल्ड ट्रंप को शांति पुरस्कार नहीं दे सकती तो कम से कम यह तो माने कि उन्होंने शांति के लिए कितना काम किया है.
चेउंग का यह बयान मारिया कोरिना मचाडो द्वारा व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान ट्रंप को अपना मेडल सौंपने के कुछ दिन बाद आया है. मचाडो ने कहा कि ट्रंप ने वेनेजुएला की स्वतंत्रता और वहां के लोकतंत्र को समर्थन देने के लिए कदम उठाए हैं और उन्हीं प्रयासों के लिए उन्हें अपना मेडल दिया है. बता दें कि मचाडो ने वेनेज़ुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण परिवर्तन की वकालत करने में अपनी भूमिका के लिए 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार जीता था.
नोबेल समिति ने पहले ही कर दिया है इनकार
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान में लिखा था कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को रद्द नहीं किया जा सकता है, किसी के साथ शेयर नहीं किया जा सकता है या दूसरों को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है. समिति ने साफ कहा है कि उसे जीतने वाले का ही नाम हमेशा उसके साथ जुड़ा रहेगा, भले आप मेडल को किसी और हाथ में सौंप दें.













