अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध, लेकिन जीत रहा रूस?

Middle East Oil Crisis: ईरान के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप की जंग से तेल निर्यात प्रभावित हो गया है. इस स्थिति ने रूसी सरकार को फायदा उठाने का अच्छा मौका दे दिया है.

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Middle East Oil Crisis: मिडिल ईस्ट के तेल संकट ने रूस को दिया बड़ा मौका
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  • अमेरिका ने रूस के ऊर्जा व्यापार को कमजोर करने के लिए भारत और चीन को रूस से दूर करने की कोशिश की थी
  • ट्रंप के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने से तेल की कीमतें बढ़ी हैं और रूस को तेल निर्यात में फायदा मिला है
  • रूस के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट के बीच आर्थिक संजीवनी साबित हुई और उसके ऊर्जा उत्पादों की मांग बढ़ी
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अमेरिका के राष्ट्रपति जंग छेड़कर ईरान को कंट्रोल करने निकले थे. अब ट्रंप का यह सपना पूरा हुआ हो या ना हुआ हो, उन्होंने रूस को एक बड़ा फायदा पहुंचा दिया है. पिछले साल के ज्यादातर समय में, जब से डोनाल्ड ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति की कुर्सी पर लौटे हैं, अमेरिकी सरकार ने रूस के ऊर्जा व्यापार को कमजोर करने की कोशिश की. अमेरिका का आरोप था कि यही व्यापार मॉस्को की “युद्ध मशीन” (War Machine) को चलाता है. इसके लिए उसने रूस के दो बड़े और वफादार खरीददार देशों, भारत और चीन को उससे दूर करने की कोशिश की.

अमेरिका ने नई दिल्ली के निर्यात पर भारी टैरिफ लगा दिए और रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए. शुरु में तो ट्रंप की यह योजना काम करती हुई दिख रही थी. लेकिन जैसे ही ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया, रूस फायदे में आ गया है. 

ट्रंप की जंग से महत्वपूर्ण तेल उत्पादन वाले क्षेत्र से तेल निर्यात प्रभावित हो गया है. इस स्थिति ने रूसी सरकार को फायदा उठाने का अच्छा मौका दे दिया है. पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन की छूट दी ताकि वे समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकें. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि “वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई जारी रह सके.”

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यूक्रेन से जुड़े रूसी तेल पर लगे कुछ और प्रतिबंध भी कम कर सकता है ताकि दुनिया में तेल की सप्लाई बढ़ सके.


पुतिन की चिंताएं और ट्रंप ने दे दिया मौका

जब व्लादिमीर पुतिन ने साल 2026 की शुरुआत की, तब उनके सामने दो विकल्प थे- या तो वे यूक्रेन में चल रही जंग को खत्म करें या फिर अपनी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान का जोखिम उठाएं. इस साल के लिए रूस के बजट में यह मानकर योजना बनाई गई थी कि रूस के मुख्य निर्यात तेल ‘उरल्स क्रूड' की कीमत औसतन 59 डॉलर प्रति बैरल रहेगी. लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों, ऊंची ब्याज दरों और मजदूरों की कमी के कारण जनवरी में रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई. इससे टैक्स से मिलने वाली आय भी उम्मीद से कम रही.

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जब रूस का वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक इस नुकसान को कम करने के तरीके पर चर्चा कर रहे थे, तभी ट्रंप ने पुतिन के लिए एक तरह का समाधान दे दिया. मौका जैसे थाली में परोस कर खुद ट्रंप लेकर आए थे. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं, जिससे रूसी सरकार की सबसे बड़ी कमाई के स्रोत (यानी तेल) को फायदा मिला.

ईरान द्वारा खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर बमबारी के बाद कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. यह 2022 की गर्मियों के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. तब रूस के द्वारा यूक्रेन पर बड़े हमले के बाद तेल बाजार में तेज उछाल आया था. 

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अब तेल की कीमतों में आया यह उछाल रूस के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय पर आई आर्थिक संजीवनी बन गई है. यूक्रेन युद्ध का खर्च रूस की अर्थव्यवस्था को संकट की ओर ले जा रहा था. कार्नेगी रूस यूरेशिया सेंटर में सीनियर फेलो सर्गेई वकुलेन्को ने पॉलिटिको से कहा, “रूसी सरकार के सामने कठिन फैसले थे. उसे खर्च कम करना पड़ता, टैक्स बढ़ाने पड़ते और यहां तक कि सैन्य खर्च में भी कुछ कटौती पर विचार करना पड़ता.”

लेकिन फिर अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया. जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल गया, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आना-जाना रुक गया. इससे तेल की कीमतें और बढ़ गईं. रूसी सरकार के आलोचक और पूर्व रूसी उप ऊर्जा मंत्री व्लादिमीर मिलोव ने पॉलिटिको से कहा, “अचानक मॉस्को को यह तोहफा मिल गया… उसे नई लाइफ लाइन मिल गई.”

मिलोव के अनुसार, इन दिनों रूसी अधिकारी “बहुत, बहुत खुश” हैं.


रूस के लिए मुनाफा वसूलने का मौका

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तेल संकट के बीच अब रूसी तेल शायद छूट पर बिकने के बजाय ऊंची कीमत पर बिक सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि रूस के मुख्य खरीदार, भारत और चीन अब अमेरिका की अनुमति के साथ तेल की सप्लाई सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं. पुतिन से बात करने के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तेल से जुड़े प्रतिबंध “कुछ देशों” के लिए हटा देगा ताकि सप्लाई की कमी कम हो सके.

सोमवार को ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात भी की. दोनों नेताओं ने युद्ध और अन्य मुद्दों पर चर्चा की. पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि खाड़ी देशों के नेताओं और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत के बाद पुतिन ने इस संघर्ष के “तेज राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान” के लिए कुछ सुझाव दिए. स्वाभाविक रूप से क्रेमलिन इस मौके का पूरा फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है.

पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को कहा, “रूस पहले भी और अब भी तेल और गैस का भरोसेमंद सप्लायर है.” उन्होंने यह भी कहा कि रूसी ऊर्जा उत्पादों की मांग बढ़ गई है.

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