बाहुबली ट्रंप को किसका डर? व्हाइट हाउस में 4 हजार करोड़ की लागत से बन रहा है अभेद्य बंकर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में चार हजार करोड़ रुपये के सुरक्षित बंकर और विशाल बॉलरूम का निर्माण करा रहे हैं. बॉलरूम निर्माण निजी चंदे से होगा, सुरक्षा उपकरणों का खर्च टैक्सपेयर्स से, पर विरोध भी तेज हैं.

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White House Bunker: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद के लिए एक बंकर बनवा रहे हैं. व्हाइट हाउस के भीतर एक ऐसा प्रोजेक्ट आकार ले रहा है जिसकी भव्यता और सुरक्षा व्यवस्था ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. करीब 4 हजार करोड़ रुपये (400 मिलियन डॉलर) की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में एक बेहद सुरक्षित बंकर और एक विशालकाय बॉलरूम शामिल है. हालांकि, इस निर्माण को लेकर कानूनी पेच भी फंसे, लेकिन फिलहाल अमेरिकी अपीली अदालत ने इस काम को जारी रखने की मंजूरी दे दी है.

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप प्रशासन ने व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को ढहाकर वहां निर्माण कार्य शुरू कराया गया. इस प्रोजेक्ट का मकसद सुरक्षा को पुख्ता करना है, इसके साथ ही व्हाइट हाउस की मेहमाननवाजी के स्तर को भी बढ़ाना है. राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि व्हाइट हाउस को एक आधुनिक और बड़े बॉलरूम की लंबे समय से जरूरत थी.

अदालत से मिली राहत

वॉशिंगटन की एक फेडरल अपीली अदालत ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रंप को इस 4 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम जारी रखने की अनुमति दे दी. इससे पहले एक निचली अदालत के जज रिचर्ड लियोन ने इस प्रोजेक्ट के ऊपरी हिस्से पर रोक लगा दी थी. जज का मानना था कि ऐतिहासिक महत्व वाली जगह पर बिना जरूरी मंजूरी के काम नहीं किया जा सकता. लेकिन तीन जजों के पैनल ने इस रोक पर फिलहाल स्टे लगा दिया है और अब अगली सुनवाई 5 जून को तय की गई है.

गौरतलब है कि अदालत ने जमीन के नीचे चल रहे काम को कभी नहीं रोका था. प्रशासन का कहना है कि यह हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है. यहां एक हाई-टेक बंकर बनाया जा रहा है जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ को सुरक्षा देगा. 

90 हजार वर्ग फुट का भव्य बॉलरूम

इस प्रोजेक्ट का सबसे आकर्षक हिस्सा 90,000 वर्ग फुट में फैला एक विशाल बॉलरूम है. इसे बनाने के लिए पिछले साल ही पुराने ईस्ट विंग को जमींदोज कर दिया गया था.

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राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस भव्य निर्माण के लिए लगने वाला पैसा अमीर दानदाताओं और बड़े कॉर्पोरेट घरानों से आएगा. यानी निर्माण का मुख्य खर्च निजी चंदे से पूरा किया जाएगा. हालांकि, इस पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और 'नेशनल सिक्योरिटी' से जुड़े उपकरणों का खर्च सरकारी खजाने यानी टैक्सपेयर्स के पैसे से उठाया जाएगा.

लेकिन इस भव्यता के पीछे विरोध के सुर भी कम नहीं हैं. 'नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन' नाम की संस्था ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. संस्था का आरोप है कि ट्रंप ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया और कांग्रेस या संबंधित संघीय एजेंसियों से मंजूरी लिए बिना ही इस ऐतिहासिक इमारत में तोड़फोड़ शुरू कर दी.

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