इंसानों सावधान! गायब होता जा रहा है दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड

दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर तेजी से पिघलता जा रहा है और कुछ ही वक्त में ये पूरी तरह विलुप्त हो सकता है. चीनी शोधकर्ताओं की इस पर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है.

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Anatarctic Glacier
नई दिल्ली:

जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया में गहराता जा रहा है. ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से आपदाओं की संख्या, तीव्रता और स्केल बढ़ रही है. दुनिया के बड़े ग्लेशियरों के पिघलने की रफ़्तार बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से समुद्रों का स्तर बढ़ रहा है और समुद्री तट कटाव (coastal erosion) की वजह से वो धीरे-धीरे सिकुड़ते जा रहे हैं. क्लाइमेट चेंज का सबसे ज़्यादा असर अंटार्कटिक में  साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. दुनिया के बड़े पर्यावरण वैज्ञानिक अंटार्कटिका में बर्फ की चादरों के पिघलने और समुद्र के स्तर पर इसके बढ़ते प्रभाव को लेकर कई बार चेतावनी जारी कर चुके हैं. 

अब खबर है कि एक समय अंटार्कटिक में दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड माने जाने वाला "A23a" का आकार उसके शुरुआती आकार 4,170 वर्ग किलोमीटर से घटकर आठवें हिस्से से भी कम रह गया है.चीन मौसम विज्ञान प्रशासन के अनुसार, फेंगयुन-3D उपग्रह (Fengyun-3D satellite) ने पाया है कि A23a, जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड था, अपने विघटन (disintegration) के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है.

चीन सरकार के आधिकारिक टीवी चैनल - China Global Television Network की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के फेंग्युन-3D उपग्रह ने पाया है कि A23a, जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड था, अपने विघटन (disintegration) के अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। 14 जनवरी को फेंगयुन-3डी उपग्रह (Fengyun-3D satellite) द्वारा कैप्चर की गई 250-मीटर रिज़ॉल्यूशन वाली वास्तविक-रंगीन इमेजरी से पता चला है कि A23a का मुख्य भाग सिकुड़कर केवल 506 वर्ग किलोमीटर रह गया है, जो 1986 में अंटार्कटिक बर्फ शेल्फ (Antarctic ice shelf) से पहली बार अलग होने के समय 4,170 वर्ग किलोमीटर के अपने मूल आकार के एक-आठवें से भी कम है.

हाल के सप्ताहों में A23a के विघटन में काफी तेजी आई है। केवल तीन सप्ताह पहले, इसका मुख्य भाग लगभग 948 वर्ग किलोमीटर में फैला था, जो इसके तेजी से विघटन (disintegration) का संकेत देता है.राष्ट्रीय उपग्रह मौसम विज्ञान केंद्र के मुख्य विशेषज्ञ झेंग झाओजुन के अनुसार, आने वाले हफ्तों में हिमखंड के पूरी तरह से गायब होने का खतरा है.फेंगयुन-3 उपग्रह (Fengyun-3D satellite) समूह के डेटा से पता चलता है कि इस साल की शुरुआत से ही A23a ग्लेशियर की विघटन दर अचानक तेज हो गई।

राष्ट्रीय उपग्रह मौसम विज्ञान केंद्र के मुख्य विशेषज्ञ झेंग झाओजुन के मुताबिक, ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के पीछे सबसे बड़ी वजह "हाइड्रोफ्रैक्चरिंग" है. इसकी वजह से हिमखंड की सतह पर पिघले पानी के तालाब और हिमनदी झीलें बर्फ पर अत्यधिक दबाव डालती हैं। उपग्रह चित्रों में स्पष्ट रूप से केंद्र में नीला पिघला हुआ पानी जमा होता हुआ दिखाई दे रहा है, जो कि किनारों पर प्राकृतिक चोटियों द्वारा फंसा हुआ है.

 दक्षिणी गोलार्ध की गर्मियों में वर्तमान परिस्थितियाँ भी A23a के तेज़ी से पिघलने की गति को तेज़ कर रही हैं. अपेक्षाकृत साफ मौसम, बढ़ता हवा का तापमान और समुद्री जल का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने से बर्फ तेज़ी से पिघल रहा है. इसके अतिरिक्त, समुद्री धाराएँ टूटे हुए टुकड़ों को गर्म उत्तरी जल की ओर ले जा रही हैं, जिससे वे और कमजोर हो रहे हैं. A23a, जो कभी क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड था, 1986 में अंटार्कटिका के फिल्चनर आइस शेल्फ (Filchner Ice Shelf) से टूट गया। कई दशकों तक बहने के बाद, अब यह पूरी तरह से विलुप्त होने के कगार पर है.

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