चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर! क्या समंदर में अमेरिका को सीधी चुनौती देने की है तैयारी?

चीन ने एक वीडियो में नए विमानवाहक पोत का संकेत दिया.यह उसका चौथा पोत हो सकता है. साथ ही यह पहला परमाणु ऊर्जा से चलने वाला भी हो सकता है.

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चीन का चौथा एयरक्राफ्ट करियर
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  • चीन ने अपनी नौसेना की 77वीं वर्षगांठ से पहले नए परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत का संकेत दिया है
  • चीन के पास वर्तमान में तीन पारंपरिक ईंधन से चलने वाले विमानवाहक पोत लियाओनिंग, शानडोंग और फुजियान सेवा में हैं
  • नया विमानवाहक पोत करीब एक लाख टन वजनी होगा और इस पर अस्सी से सौ लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं
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नई दिल्ली:

आपसे अगर पूछा जाए कि दुनिया जीतने के लिए जमीन या पानी में से किसपर कब्जा करना ज्यादा जरूरी है? तो शायद आपका जवाब होगा जमीन पर लेकिन यकीन मानिए बगैर पानी पर कब्जा किए किसी के लिए ये कर पाना संभव नहीं है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि अतीत में जिन भी देशों ने दुनिया पर राज किया वो अपनी नेवी, अपने जंगी जहाजों की बदौलत ही ऐसा कर पाए थे. और अब इस कड़ी में चीन भी खुदको जोड़ने की कोशिश में लगा है. यह वजह है कि वो अपनी समुद्री ताकत को लगातार बढ़ा रहा है. चीन ने एक वीडियो में नए विमानवाहक पोत का संकेत दिया.यह उसका चौथा पोत हो सकता है. साथ ही यह पहला परमाणु ऊर्जा से चलने वाला भी हो सकता है.

चीन ने यह वीडियो अपनी नौसेना की 77वीं वर्षगांठ से पहले जारी किया है. इसमें काल्पनिक अधिकारियों को दिखाया गया. उनके नाम मौजूदा पोतों से मिलते-जुलते हैं. चीन के पास पहले से ही तीन विमानवाहक पोत पहले से सेवा में हैं. इनके नाम हैं लियाओनिंग, शानडोंग और फुजियान. ये तीनों एयरकाफ्ट कैरियर पारंपरिक ईंधन से चलते हैं.

चीन ने जो वीडियो जारी किया है, उसका टाइटल इन टू द डीप रखा है. इसमें 19 साल का नया किरदार दिखा जिसका नाम “हे जियान” रखा गया. इस नाम से अटकलें तेज हो गईं हैं की अगले एयरक्राफ्ट कैरियर का नाम यही हो सकता है. चीन की मैंड्रिन भाषा में इसका मतलब परमाणु जहाज जैसा लगता है. वही  उम्र 19, नए पोत के नंबर का संकेत मानी जा रही है. चीन ने इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया. साथ ही वहां के रक्षा मंत्रालय ने भी कोई जवाब नहीं दिया है. 

वहीं, ख़बरों की मानें तो चीन ब्लू-वॉटर नेवी बना रहा है. यानी दूर समुद्र में अपनी ताकत दिखाने की क्षमता को डेवलप कर रहा है. इस पर वह अरबों डॉलर खर्च कर रहा है. इसी वीडियो में युद्ध अभ्यास और हमले के दृश्य भी हैं. यह ताइवान के लिए एक संदेश भी माना जा रहा है. कई एक्सपर्ट कह रहे हैं की चीन भविष्य में ताइवान पर कब्जे के इरादे से ये कर रहा है.चीन ताइवान पर अपना दावा करता है.

हाल ही में ताइवान की विपक्षी पार्टी की नेता भी.चीन गई थी. दूसरी तरफ अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद वह अब उतना ताकतवार नही रहा. कम से कम कूटनीतिक तौर पर तो अमेरिका पिछड़ता जा रहा है. ऐसे में अब आशंका जताई जा रही है कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है. वैसे सैटेलाइट तस्वीरों से भी संकेत मिले हैं कि चीन के डालियान शिपयार्ड में एक बड़ा पोत बन रहा है. इसका आकार अमेरिकी विमानवाहक पोत जैसा बताया जा रहा है. कुछ तस्वीरों में न्यूक्लियर रिएक्टर जैसी संरचना दिखी है. इससे अटकलें और बढ़ गईं हैं कि हो न हो ये संभवत: एयरक्राफ्ट कैरियर ही है. 

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80 से 100 लड़ाकू विमान हो सकते हैं तैनात

चीन ने 2022 में फुजियान विमान वाहक पोत शामिल किया था. यह उसका सबसे आधुनिक एयर काफ्ट कैरियर माना जाता है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम है. अगर चीन का चौथा एयरकाफ्ट कैरियर की बात करें तो यह करीब एक लाख टन वजनी हो सकता है. यानी यह सीधे अमेरिकी कैरियर्स को टक्कर देगा. अगर ऐसा हुआ तो इस पर करीब 80 से 100 लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं. लड़ाकू विमान के साथ-साथ इस पर अटैक हेलीकॉप्टर भी तैनात होंगे . चूंकि यह परमाउ उर्जा से चलने वाला कैरियर है तो यह असीमित रेंज का होने के साथ हाई स्पीड भी होगा. इशकी रफ्तार करीब 50 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक हो सकती है जो कैरियर के हिसाब से काफी अधिक है. यह बिना ईधन भरे सालों समंदर में ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. कुल मिला कर यह सीधे-सीधे समंदर अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देता है.

अमेरिका के पास 11 तो चीन के पास हैं तीन विमान वाहनपोत

वहीं, अमेरिका की बात करें तो उसके पास 11 विमानवाहक पोत हैं. सभी परमाणु ऊर्जा से चलते हैं. चीन के पास 3 विमान वाहकपोत हैं. भारत के पास 2 विमान वाहक पोत, आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य हैं. रक्षा  विशेषज्ञों का मानना है  कि दुनिया में तनाव बढ़ रहा है इसलिए चीन और भी पोत बना सकता है. हिंद महासागर में भी चीन की मौजूदगी बढ़ रही है. आज जिबूती, ग्वादर और हम्बनटोटा जैसे स्ट्रेटेजिक लोकेशंस पर उसकी पहुंच है. लेकिन विमानवाहक पोत में  अमेरिका चीन से आगे है. अब तक चीन सीधे सीधे अमेरिका को चुनौती देने से बचता है लेकिन वह दिन दूर नही जब चीन अमेरिका के किसी भी हरकत का माकूल जवाब देता नजर आयेगा. क्योंकि ईरान की जंग ने दुनिया को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. वही भारत की समुद्री सुरक्षा को एक बार फिर से नये सिरे से सोचने की जरुरत है कि वह चीन की भारी भरकम नेवी पावर से कैसे निपटेगी.

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