- चीन की जन्म दर 1949 के बाद सबसे निचले स्तर पांच दशमलव छह प्रति हजार व्यक्ति पर आ गई है
- पिछले वर्ष नवजात शिशुओं की संख्या में एक दशमलव छह मिलियन की कमी आई जो सबसे बड़ी गिरावट है
- चीन की कुल जनसंख्या में तीन दशमलव चार मिलियन की गिरावट आई है, जो 1960 के अकाल के बाद सबसे बड़ी है
दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी कई सालों तक चीन की रही, मगर भारत ने उसे पछाड़ दिया. अब चीन नंबर 2 है, लेकिन उसकी जनसंख्या इतनी तेजी से घट रही है कि सरकार चिंता में पड़ गई है. आलम ये है कि सरकार बच्चे पैदा करने पर पैरेंट्स को लंबी छुट्टी दे देती है. इसके साथ ही हर बच्चे के पैदा होने पर हर साल 500 डॉलर तीन साल तक प्रति वर्ष दिए जाते हैं. इसके बावजूद हालत ये है कि चीन की जन्म दर पिछले वर्ष 1949 के बाद सबसे निचले स्तर पर गिर गई है.
1960 के अकाल के बाद सबसे बड़ी गिरावट
ब्लूमबर्ग के अनुसार, ये बीजिंग के लिए बढ़ती जनसांख्यिकीय (Demographic) चुनौतियों को उजागर करती है. ये हालात तब हैं जब अधिकारियों ने कपल्स को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए कई सब्सिडी योजनाएं शुरू की हुईं हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रति 1,000 व्यक्तियों पर जन्म की संख्या घटकर 5.6 हो गई. यह कम से कम पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना के बाद से सबसे कम है. नवजात शिशुओं की संख्या में 1.6 मिलियन की कमी आई, जो 2020 के बाद सबसे अधिक है, और यह संख्या 7.9 मिलियन हो गई.
यह आंकड़ा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रजनन-अनुकूल समाज को बढ़ावा देने के अभियान के लिए एक झटका है. इस अभियान के तहत माता-पिता को नकद पुरस्कार देना भी शामिल है. चीन की कुल जनसंख्या में 3.4 मिलियन की गिरावट आई है. ये पूर्व नेता माओत्से तुंग के शासनकाल में 1960 के भीषण अकाल के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, और यह 1.405 बिलियन हो गई है.
इसका असर क्या होगा
घटता वर्कफोर्स और बढ़ती बुजुर्ग आबादी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख खतरे हैं. जैसे-जैसे बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, कामगार और रिटायर लोगों का अनुपात घट रहा है, जिससे पहले से ही कम अंडफंडेड पेंशन सिस्टम पर और दबाव बढ़ रहा है. इन स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना करने के लिए, चीन की सरकार ने हाल के वर्षों में कई जन्म-प्रधान नीतियां लागू की हैं, जिनमें पिता और मां बनने पर अवकाश की अवधि बढ़ाना और विवाह पंजीकरण को आसान बनाना शामिल है. इन प्रोत्साहनों में, कपल्स को 1 जनवरी, 2025 को या उसके बाद पैदा हुए प्रत्येक बच्चे के लिए तीन वर्ष की आयु तक लगभग 500 डॉलर प्रति वर्ष दिए जाते हैं. इस वर्ष से, सरकार ने गर्भनिरोधक दवाओं और उपकरणों पर 13 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स भी लगाया है, जिसमें मॉर्निंग-आफ्टर पिल्स और कंडोम शामिल हैं.
एक बच्चा पैदा करना पड़ा भारी
स्वतंत्र जनसांख्यिकी विशेषज्ञ ही याफू ने कहा कि जन्म दर में सार्थक वृद्धि के लिए सरकारी सब्सिडी की राशि "बहुत कम" है. उन्होंने इस गिरावट का कारण युवाओं की शादी करने की अनिच्छा और प्रजनन आयु की महिलाओं की संख्या में कमी को बताया, जो 2020 से 2025 के बीच 1.6 करोड़ कम हो गई. संभावित माताओं की यह घटती संख्या आंशिक रूप से एक-बच्चा नीति का परिणाम है, जिसने 2015 में समाप्त होने से पहले भविष्य के विकास के लिए जनसांख्यिकीय आधार को खोखला कर दिया था.
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