चीन सरकार ने तिब्बती भिक्षु पालडेन येशे को 6 साल की जेल की सजा सुनाई है. उन पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल की छुट्टियों में 300 तिब्बती छात्रों को अपनी मातृभाषा (तिब्बती) भाषा सिखाई. इस घटना के बाद चीन पर तिब्बती भाषा और संस्कृति को दबाने के आरोप फिर से बढ़ गए हैं.
बिना किसी सूचना के पुलिस साथ ले गई
रिपोर्ट के अनुसार, पालडेन येशे जो करजे काउंटी के तेहोर क्षेत्र के करजे मठ से जुड़े हैं, 17 मई 2021 को चीनी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार किया गया. पुलिस बिना किसी सूचना के मठ में पहुंच गई और उन्हें अपने साथ ले गई. वह बच्चों को छुट्टियों के दौरान तिब्बती भाषा पढ़ना और लिखना सिखाते थे. इन कक्षाओं में आसपास के इलाकों के 300 से ज्यादा बच्चे आते थे. लेकिन चीनी अधिकारियों ने इसे गैर-कानूनी गतिविधि माना.
सुनाई 6 साल की सजा
गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने परिवार को यह नहीं बताया कि उन्हें किस वजह या किस कानून के तहत पकड़ा गया. काफी समय तक परिवार को कोई जानकारी नहीं मिली. 8 जनवरी को सामने आई नई जानकारी में पता चला कि पालडेन येशे फिलहाल चुषुल जेल में बंद हैं और उन्हें छह साल की सजा सुनाई गई है. हालांकि अधिकारियों ने अब तक उन पर लगे आरोपों की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि बच्चों को तिब्बती भाषा सिखाना ही इसके पीछे की असल वजह है.
पालडेन येशे की गिरफ्तारी का परिवार पर बड़ा असर पड़ा है. उनके बुजुर्ग पिता को बेटे की गिरफ्तारी की खबर के बाद गहरा मानसिक आघात लगा. वहीं, पुलिस के बार‑बार पूछताछ और दबाव डालने से परिवार और परेशान हो गया. मानसिक तनाव की वजह से उनके पिता का निधन 29 सितंबर 2022 को हो गया.
चीन कर रहा सख्ती
इस मामले को लेकर कई लोगों का कहना है कि तिब्बती भाषा और संस्कृति को बचाने की कोशिश करने वाले लोगों पर चीन में अब और भी सख्ती बढ़ गई है. चीन सरकार की ओर से अभी तक यह नहीं बताया गया है कि पालडेन येशे को किन आरोपों में जेल भेजा गया है.













