पहले अबू आधी, अब सऊदी के क्राउन प्रिंस को कॉल... होर्मुज संकट के बहाने पूरे मिडिल ईस्ट को साध रहा ड्रैगन?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सऊदी क्राउन प्रिंस से फोन पर बातचीत कर जलमार्ग खोलने और तत्काल युद्धविराम की अपील की. चीन ने विवाद सुलझाने के लिए कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया है.

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अप्रैल 2026 में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव और ईरान‑अमेरिका संघर्ष के साये में चीन मिडिल ईस्ट में अपनी कूटनीतिक पकड़ लगातार मजबूत करता दिख रहा है. इसी कड़ी में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से फोन पर अहम बातचीत की है.

यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब हाल ही में शी जिनपिंग की अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी मुलाकात हुई थी. लगातार हो रहे इन उच्चस्तरीय संपर्कों को पश्चिम एशिया में चीन की सक्रिय और रणनीतिक भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। खास तौर पर तब, जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बार फिर संकट का केंद्र बना हुआ है.

चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा, 'चीन तत्काल और व्यापक युद्धविराम का आह्वान करता है, शांति बहाली के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और इस बात पर जोर देता है कि विवादों का समाधान राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से किया जाना चाहिए. हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य आवाजाही के लिए खुला रहना चाहिए, यह क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय सभी के साझा हित में है.'

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क्यों अहम है यह बयान

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति में इसकी भूमिका बेहद अहम है. अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी जारी है, वहीं ईरान ने 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अपने तेल जहाजों को छोड़कर बाकी आवाजाही लगभग रोक दी है.

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लंबे वक्त बाद हुई सऊदी प्रिंस और जिनपिंग की बात

यह पिछले तीन वर्षों में शी जिनपिंग और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच पहली सीधे फोन पर बातचीत थी. इससे पहले शी ने ईरान युद्ध को लेकर अपने शुरुआती सार्वजनिक बयान स्पेन के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान दिए थे, जहां उन्होंने चेतावनी दी थी कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अराजकता की ओर बढ़ रही है और चीन मध्य पूर्व में रचनात्मक भूमिका निभाएगा.

चीन के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. चीन दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी (Liquefied Natural Gas) आयातक है और इस मार्ग से होने वाली सप्लाई पर उसकी निर्भरता ज्यादा है. बीजिंग अभी भी अपने कुल तेल आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से लेता है. वहीं, व्यापार के मोर्चे पर भी हालात बिगड़ने लगे हैं. मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र चीन के कुल निर्यात का करीब 7 प्रतिशत है, लेकिन मार्च महीने में इस क्षेत्र में चीनी निर्यात 43% तक गिर गया, जो संघर्ष के असर को दर्शाता है.

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अस्थायी राहत और फिर टकराव

गौरतलब है कि ईरान ने पिछले सप्ताह इजरायल‑हिज्बुल्लाह युद्धविराम के बाद हॉर्मुज खोलने की घोषणा की थी, जिससे तेल कीमतों में तेज गिरावट आई. लेकिन अमेरिका द्वारा अपनी नाकाबंदी हटाने से इनकार के बाद ईरान ने फैसला पलट दिया. इसके बाद अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज पर गोलीबारी कर उसे अपने कब्जे में ले लिया. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, होर्मुज और मलक्का जैसे रणनीतिक जलमार्गों से जहाजों की मुक्त आवाजाही को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) संरक्षण देता है.

अमेरिका की निर्भरता पर सवाल

शी जिनपिंग ने सऊदी प्रिंस से बातचीत में यह भी कहा कि चीन पश्चिम एशिया के देशों के अपने भविष्य और किस्मत पर खुद नियंत्रण रखने का समर्थन करता है. इसे क्षेत्रीय देशों से अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता पर पुनर्विचार करने का अप्रत्यक्ष संदेश माना जा रहा है.

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दिलचस्प बात यह है कि इस तरह की भाषा हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस्तेमाल कर चुके हैं, जिन्होंने युद्ध की शुरुआत में ईरान के लोगों से अपनी किस्मत खुद तय करने की अपील की थी. कुल मिलाकर, चीन होर्मुज संकट में अब खुलकर सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में दिख रहा है और शी जिनपिंग का यह बयान मिडिल ईस्ट की कूटनीति में एक अहम संकेत माना जा रहा है.

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