यह हिंसक उग्रवाद... 40 साल पहले खालिस्तानियों ने विस्फोट कर उड़ा दिया था प्लेन, कनाडा के पीएम ने एक्स पर मृतकों को किया याद

23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 182  जिसे 'कनिष्क' के नाम से जाना जाता है मॉन्ट्रियल से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. यह लंदन होते हुए दिल्ली जा रही थी. लेकिन हीथ्रो एयरपोर्ट से महज 45 मिनट पहले, जब विमान आयरलैंड के कॉर्क तट के पास समुद्र में उड़ रहा था, तभी उसमें जोरदार विस्फोट हुआ.इस विस्फोट में विमान में सवार सभी लोग मारे गए थे.

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नई दिल्ली:

कनाडा ने सोमवार को एयर इंडिया फ्लाइट 182 'कनिष्क' बम विस्फोट की 40वीं बरसी पर उन निर्दोष लोगों को याद किया, जिनकी जान 23 जून 1985 को एक भीषण आतंकवादी हमले में चली गई थी. इस हमले को आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है. 

कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस अवसर पर एक भावुक बयान में कहा, “40 साल पहले हुए इस हमले में 268 कनाडाई नागरिक मारे गए थे. यह हमारे देश के इतिहास का सबसे दर्दनाक हमला है. हम कभी नहीं भूल सकते हैं”

यह हमला कब और कैसे हुआ था?

23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 182  जिसे 'कनिष्क' के नाम से जाना जाता है मॉन्ट्रियल से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. यह लंदन होते हुए दिल्ली जा रही थी. लेकिन हीथ्रो एयरपोर्ट से महज 45 मिनट पहले, जब विमान आयरलैंड के कॉर्क तट के पास समुद्र में उड़ रहा था, तभी उसमें जोरदार विस्फोट हुआ.इस विस्फोट में विमान में सवार सभी लोग मारे गए थे.

जिनमें से अधिकांश भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे. इस हमले के लिए सिख उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया गया था, जो उस वक्त भारत में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या से नाराज़ थे. 

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40वीं बरसी पर लोगों ने मृतकों को किया याद

दिल्ली में कनाडा हाउस में आयोजित स्मृति कार्यक्रम में कनाडा की प्रभारी उच्चायुक्त जेनिफर डौबेनी और भारत में आयरिश राजदूत केविन केली ने भाग लिया. इस कार्यक्रम में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक भी शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत एक मिनट के मौन से की गई, जिसमें हाल ही में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के पीड़ितों को भी श्रद्धांजलि दी गई.

आयरलैंड के कॉर्क में स्थित अहाकिस्ता मेमोरियल पर भी एक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ, जिसमें आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन, कनाडा के लोक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हिस्सा लिया.  पुरी ने अपने संबोधन में कहा कि कनिष्क बम विस्फोट हमें यह याद दिलाता है कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती, और इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है. 

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हम भूलेंगे नहीं, डरेंगे नहीं

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘X' पर लिखा, “यह एक गंभीर स्मरण है कि दुनिया को आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के खिलाफ बिल्कुल जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए. वहीं, कनाडा ने 23 जून को राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मृति दिवस के रूप में मनाकर दुनिया को यह संदेश दिया कि पीड़ा को भुलाया नहीं जाता, बल्कि उसे न्याय और सुधार का आधार बनाया जाता है.

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