ब्रह्मोस बनाने वाले रूसी मिसाइल डिजाइनर ने 74 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

Russian Missile Designer Alexander Leonov Dies: अलेक्जेंडर लियोनोव रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPOMASH) के CEO और मुख्य डिजाइनर थे. यह कंपनी दिल्ली स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस की रूसी साझेदार (ज्वाइंट वेंचर पार्टनर) है.

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रूसी मिसाइल डिजाइनर अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन
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  • रूस के प्रमुख मिसाइल डिजाइनर अलेक्जेंडर लियोनोव का 74 वर्ष की उम्र में निधन हुआ
  • लियोनोव को हाइपरसोनिक जिरकोन मिसाइल के डिजाइन के लिए जाना जाता है, जिसे जनवरी 2023 में सेवा में शामिल किया गया
  • उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना में योगदान दिया और कई तटीय रक्षा प्रणालियों के विकास में भी भूमिका निभाई
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Russian Missile Designer Alexander Leonov Dies: रूस के एक बड़े मिसाइल डिजाइनर अलेक्जेंडर लियोनोव का रविवार, 5 अप्रैल को 74 साल की उम्र में निधन हो गया. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार रूस की स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी. लियोनोव रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPOMASH) के CEO और मुख्य डिजाइनर थे. यह कंपनी दिल्ली स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस की रूसी साझेदार (ज्वाइंट वेंचर पार्टनर) है.

उनकी प्रेस सेवा ने यह नहीं बताया कि उनकी मौत किस कारण से हुई और उनकी मौत कहां हुई. यह जानकारी समाचार पोर्टल RBC ने दी.

ब्रह्मोस मिसाइल को किया डेवलप

लियोनोव को रूस की हाइपरसोनिक मिसाइल- जिरकोन मिसाइल (त्सिरकोन) के डिजाइन का श्रेय दिया जाता है. यह एक जहाज से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे समुद्र और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. यह 3K22 मिसाइल सिस्टम का हिस्सा है, जिसे जनवरी 2023 में सेवा में शामिल किया गया था.

यह मिसाइल नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों से छोड़ी जा सकती है और इसे तटीय रक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ओपन सोर्सेज के हवाले से RBC ने बताया कि जिरकॉन मिसाइल की स्पीड मैख 9 तक हो सकती है, यानी आवाज़ की गति से लगभग 9 गुना तेज. इसकी मारक दूरी लगभग 400 से 1500 किलोमीटर तक है और यह सामान्य और परमाणु, दोनों तरह के वारहेड ले जा सकती है.

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लियोनोव को “Hero of Labour” का गोल्डन स्टार सम्मान भी मिला था. उन्होंने अंतरिक्ष प्रणालियों और मिसाइल प्रणालियों के डिजाइन के काम की देखरेख की। उन्होंने ग्रेनाइट मिसाइल, वल्कन मिसाइल और बैस्टियन तटीय रक्षा प्रणाली जैसे तटीय रक्षा सिस्टम के विकास और उन्हें सेवा में शामिल करने में हिस्सा लिया. इन प्रणालियों में ओनिक्स मिसाइल (जिस पर भारत-रूस की ब्रह्मोस मिसाइल आधारित है) का इस्तेमाल किया जाता है.

उन्होंने रूस-भारत के ब्रह्मोस संयुक्त परियोजना के काम में भी योगदान दिया और उन्नत हाइपरसोनिक वाहनों के विकास में भी भूमिका निभाई, रूसी समाचार एजेंसियों ने बताया.

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