बांग्लादेश में तारिक रहमान के हर मंत्री पर नजर, जानें क्या है हार से बौखलाए जमात का 'शैडो कैबिनेट' वाला प्लान

What is shadow cabinet: बांग्लादेश में एक तरफ तो तारिक रहमान की कैबिनेट शपथ लेने वाली है तो वहीं दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ने एक शैडो कैबिनेट बनाने का ऐलान कर दिया है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
बांग्लादेश में शैडो कैबिनेट बनाएगा विपक्ष
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत हासिल कर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार बना रही है
  • जमात-ए-इस्लामी नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने शैडो कैबिनेट बनाने की घोषणा कर दी है
  • यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया में भी शैडो कैबिनेट बनती है जो सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करती है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 13वें संसदीय चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर बांग्लादेश में सत्ता की चाभी अपने हाथ में थाम ली है. पार्टी के सुप्रीमो तारिक रहमान प्रधानमंत्री होंगे और अपनी कैबिनेट के साथ मंगलवार, 17 फरवरी को संसद परिसर के साउथ प्लाजा में शपथ लेंगे. खास बात यह है कि एक तरफ तो तारिक रहमान की कैबिनेट शपथ लेने वाली है तो वहीं दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ने एक शैडो कैबिनेट बनाने का ऐलान कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह शैडो कैबिनेट होती क्या है, इसका काम क्या होता है. किन देशों में ऐसी कैबिनेट बनी है. आपको इन सभी सवालों का जवाब इस एक्सप्लेनर में देंगे.

नोट- रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 297 में से 209 सीट जीती, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 13वें संसदीय चुनाव में 68 सीट हासिल की हैं. अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था.

शैडो कैबिनेट को लेकर क्या ऐलान हुआ है?

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार जमात नेता और बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के वकील शिशिर मोनिर की "शैडो कैबिनेट" के गठन के संबंध में घोषणा की है और इससे राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है. शिशिर मोनिर ने शनिवार की रात अपने वेरिफाइड फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में शैडो कैबिनेट बनाने की योजना की घोषणा की. इसमें कहा गया, "हम एक शैडो कैबिनेट बनाएंगे, इंशाअल्लाह."

इस घोषणा ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ बांग्लादेश की जनता के बीच नए सिरे से दिलचस्पी पैदा की है. जमात के गठबंधन में शामिल छात्र नेताओं की पार्टी- नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के प्रवक्ता आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने भी इसी तरह की घोषणा की है. रविवार सुबह आसिफ महमूद ने फेसबुक पर लिखा, "हम एक शैडो कैबिनेट बनाने की तैयारी कर रहे हैं. शैडो कैबिनेट सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने और सभी गतिविधियों की निगरानी के लिए एक प्रहरी (वॉचडॉग) के रूप में काम करेगी."

तो क्या होती है शैडो कैबिनेट?

शैडो कैबिनेट का विचार कोई नया नहीं है. इसकी अवधारणा वेस्टमिंस्टर सिस्टम पर आधारित संसदीय प्रणालियों से निकटता से जुड़ी हुई है. जिन देशों में शैडो कैबिनेट बनता है उसमें विपक्षी दल अक्सर सरकारी नीतियों की निगरानी, ​​आलोचना और जनता के सामने उनका विकल्प दिखाने के लिए अपना खुद का मंत्रिमंडल यानी कैबिनेट नियुक्त करते हैं.  एक शैडो कैबिनेट में आमतौर पर विपक्षी सदस्य होते हैं उनमें से प्रत्येक को अलग-अलग सरकारी मंत्रालय सौंपी जाती है. ये असली मंत्री नहीं है, ये शैडो मंत्री है. इसे ऐसे समझिए जैसे नाटक कर रहे हों लेकिन उनका उद्देश्य बड़ा होता है. ये शैडो मंत्री सरकारी नीतियों और बजट का खुद विश्लेषण करते हैं, उनकी आलोचनाएं करते हैं और, जहां आवश्यक हो, वैकल्पिक प्रस्ताव सामने रखते हैं.

किन देशों में शैडो कैबिनेट बनती है?

यूनाइटेड किंगडम में भी विपक्ष शैडो कैबिनेट बनाता है. यह शैडो कैबिनेट रूप से सरकारी गतिविधियों की निगरानी करती है और संसद में मंत्रियों से पूछताछ करके जवाबदेही सुनिश्चित करती है. इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में भी शैडो कैबिनेट बनती है. इसके शैडो मंत्री सरकारी निर्णयों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

विपक्ष को शैडो कैबिनेट से क्या फायदा है?

यहां यह बात समझनी जरूरी है कि शैडो कैबिनेट को बनाने का मकसद सिर्फ असली कैबिनेट की आलोचना नहीं है. यह दरअसल विपक्षी नेताओं के लिए एक तरह की ट्रेनिंग के रूप में भी काम करता है. इससे विपक्षी पार्टी के सदस्यों को प्रशासनिक संरचनाओं, बजट और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं में व्यावहारिक अनुभव मिलता है. यह अनुभव उन्हें भविष्य में सरकार बनने की स्थिति में शासन संभालने के लिए तैयार करता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: चुनाव हारकर भी जमात-ए-इस्लामी भारत के लिए क्यों बना सबसे बड़ा खतरा?

Topics mentioned in this article