- बांग्लादेश में 299 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक होगा
- इस चुनाव में 12.7 करोड़ से अधिक वोटर हिस्सा ले रहे हैं और 9.58 लाख से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं
- अवामी लीग पार्टी पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है और उनके खिलाफ दबाव और धमकियां मिलने की शिकायत की गई है
उम्मीद और चिंता के बीच बांग्लादेश के बीच गुरुवार को आम चुनाव होने जा रहे हैं. 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश जबरदस्त अशांति से जूझ रहा है. हालांकि, चुनाव से पहले हालात थोड़े सामान्य जरूर नजर आ रहे हैं. लोग अपनी सामान्य जिंदगी जी रहे हैं लेकिन हवा में एक टेंशन साफ महसूस हो रही है.
बांग्लादेश में ये 13वें आम चुनाव हैं. 299 संसदीय सीटों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक वोटिंग होगी. शाम को वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी. चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह भी होगा. इसे 'जुलाई चार्टर' कहा जाता था. अगस्त 2024 में जब मोहम्मद यूनुस ने सरकार का काम संभाला था, तो उन्होंने जनमत संग्रह का वादा किया था.
50% से ज्यादा पोलिंग बूथ 'सेंसेटिव'
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, बांग्लादेश में 50% से ज्यादा पोलिंग बूथ को 'संवेदनशील' की कैटेगरी में रखा गया है. चुनाव अधिकारियों का कहना है कि 90% पोलिंग बूथ पर CCTV लगाए गए हैं. राजधानी ढाका में 'बॉडी कैमरे' लगाए कई पुलिसकर्मियों को पोलिंग बूथ पर तैनात किया जाएगा. इस चुनाव में 12.7 करोड़ से ज्यादा वोटर हिस्सा ले रहे हैं. सुरक्षा के लिए देशभर में 9.58 लाख से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है, खासकर संवेदनशील इलाकों में. इसके साथ ही 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को भी तैनात किया गया है.
बांग्लादेश चुनाव: एक नजर में
- कितनी सीटों पर वोटिंग:299 संसदीय सीटों पर 8 लाख से ज्यादा चुनाव अधिकारियों को लगाया गया है. इस चुनाव में लगभग 50 राजनीतिक पार्टियां मैदान में हैं. शेरपुर-3 सीट पर उम्मीदवार की मौत के बाद यहां चुनाव रद्द कर दिया गया है.
- कितने उम्मीदवार: 299 सीटों के लिए कुल 2,028 उम्मीदवार मैदान में हैं. राजनीतिक पार्टियों के 1,755 उम्मीदवार हैं. वहीं, 273 उम्मीदवार निर्दलीय लड़ रहे हैं, जिनमें तस्नीम जारा जैसे नाम भी शामिल हैं.
- कैसे होगा चुनाव: बांग्लादेश में बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके चुनाव होते हैं. बैलेट पेपर को ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में डाला जाता है. वोटिंग खत्म होने के बाद ही इनकी गिनती की जाएगी.
- कई देशों के ऑब्जर्वर मौजूद: पाकिस्तान, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, चीन, यूरोपीय यूनियन जैसे कई देशों में बांग्लादेश में अपने ऑब्जर्वर भेजे हैं. जनवरी 2024 में हुए पिछले चुनाव के बाद से ऑब्जर्वर की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. भारत ने अपने ऑब्जर्वर नहीं भेजे हैं.
शेख हसीना का कितना असर?
जनवरी 2024 में जब आखिरी बार चुनाव हुए थे, तो शेख हसीना भारी बहुमत से सत्ता में लौटी थीं. उनके ऊपर चुनाव में धांधली करने का आरोप भी लगा था. इसी कारण उनके खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आई थी. आखिरकार 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और बांग्लादेश छोड़कर भारत आना पड़ा.
इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग नहीं लड़ रही है. अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर बैन लगा हुआ है. ढाका में चुनाव कवर करने आए विदेशी पत्रकारों ने जब सवाल किया कि इस चुनाव में अवामी लीग पर बैन से क्या असर पड़ेगा? तो चुनाव आयोग इस मुद्दे पर सीधा जवाब देने से बचता रहा. हालांकि, चुनाव आयोग ने उन रिपोर्ट्स का खंडन जरूर किया कि अवामी लीग की गैरमौजूदगी से वोटर टर्नआउट में कमी की बात कही गई थी.
वहीं, अवामी लीग का कहना है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी आम नागरिकों के साथ-साथ अवामी लीग के नेताओं और एक्टिविस्ट पर लगातार दबाव डाल रहे हैं और उन्हें चुनाव में न आने के लिए धमका रहे हैं. अवामी लीग का कहना है कि यह तरीका वोटर टर्नआउट के आंकड़ों को बढ़ाने के लिए अपनाया जा रहा है. अवामी लीग का कहना है कि ये चुनाव पहले से ही तय हैं.
किसकी जीत का दावा मजबूत?
बांग्लादेश में मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच है. बांग्लादेश पर नजर रखने वाले BNP की जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं. हालांकि, उनका कहना है कि जमात अब तक के चुनावों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी. BNP को भी अपनी जीत की उम्मीद है और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अभी भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं.
जहां BNP ने जमात पर वोटरों को रिश्वत देने का आरोप लगाया है, वहीं जमात का कहना है कि कई पोलिंग बूथ पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं और ऐसा BNP की मदद करने के लिए किया गया है.
जमात और BNP सपोर्टर्स के बीच टकराव की उम्मीद है क्योंकि BNP को लगता है कि वह जीतेगी, जिससे BNP चेयरपर्सन तारिक रहमान के अगले प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ होगा, जबकि जमात को अच्छे परफॉर्मेंस का भरोसा है जिससे डॉ. शफीकुर रहमान प्रधानमंत्री बन सकते हैं.













