- BLA ने पाकिस्तानी सेना के कम से कम आठ जवानों को बंधक बना रखा है और अपने कैदियों की रिहाई मांगी है
- बंदी बनाए गए सैनिकों ने अपने सेवा और राष्ट्रीय पहचान पत्र दिखाकर पाकिस्तान सरकार से मदद की गुहार लगाई है
- बीएलए ने पाकिस्तानी सरकार को सात दिन की समय सीमा दी है, अन्यथा बंदियों को मौत की सजा दी जा सकती है
"सेना यह कैसे कह सकती है कि हम उनके जवान नहीं हैं? यह किसका कार्ड है?" दूसरा सैनिक कहता है, "मेरा पहचान पत्र देखिए; यह मुझे पाकिस्तान ने जारी किया है... मेरी गुजारिश है, अल्लाह के लिए, मेरे पिता विकलांग हैं, मैं घर में सबसे बड़ा हूं. यह कहकर हमारे साथ अन्याय मत कीजिए कि हम आपके जवान नहीं हैं." तीसरा कहता है, "अगर आप यह कहने वाले थे कि हम आपके जवान नहीं हैं, तो आपने मुझे भर्ती क्यों किया? आप वीडियो को फर्जी क्यों कह रहे हैं?"
वीडियो देखें
मामला क्या है
ये सैनिक पाकिस्तान के हैं. इन्हें बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बंधक बना लिया है. इन सैनिकों को छोड़ने के बदले बीएलए ने बलूचों की रिहाई की मांग की थी, मगर पाकिस्तान ने कह दिया कि वीडियो फर्जी है और बीएलए की कैद में मौजूद लोग उसके सैनिक नहीं है. बीएलए ने इन सैनिकों को ये बात बताई तो पाकिस्तानी सैनिक अपने ही अधिकारियों और सरकार पर भड़क गए. रोने लगे. गुहार लगाने लगे. इस वीडियो में कम से कम आठ पाकिस्तानी सेना के जवान बीएलए की हिरासत में दिख रहे हैं.
बीएलए ने अपने मीडिया विंग हक्कल के माध्यम से जारी किए गए नई फुटेज में, हिरासत में लिए गए सभी पाकिस्तानी सैनिक कैमरे के सामने अपने आधिकारिक सेवा पहचान पत्र और राष्ट्रीय पहचान पत्र दिखाते हुए इस्लामाबाद के अधिकारियों से मदद की अपील कर रहे हैं.
कब पकड़े गए ये सैनिक
इस सप्ताह की शुरुआत में, बीएलए ने पाकिस्तानी सरकार को कैदियों की अदला-बदली के लिए सात दिन की समय सीमा दी थी और चेतावनी दी थी कि यदि इस अवधि के भीतर बातचीत नहीं हुई तो बंदियों को मौत की सजा दी जा सकती है. खबरों के अनुसार, यह समय सीमा 22 फरवरी को समाप्त हो रही है. बीएलए ने कहा था कि बंदियों को "ऑपरेशन हेरोफ" के दूसरे चरण के दौरान पकड़ा गया था. संगठन ने दावा किया कि उसने कुछ बंदियों को चेतावनी के बाद रिहा कर दिया था, क्योंकि उनकी पहचान बलूच जातीय समूह के रूप में हुई थी और वे स्थानीय पुलिस से जुड़े हुए थे.
हालांकि, शेष पाकिस्तानी सेना की नियमित इकाइयों के सदस्य थे, जिन्हें बंदी बनाकर रखा गया था और उन पर बलूच राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा कार्यवाही की जा रही थी. समूह ने कहा है कि यदि पाकिस्तानी सरकार इस दौरान युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए औपचारिक रूप से सहमति व्यक्त करती है, तो पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा बंदी बनाए गए बलूच कैदियों की रिहाई के बदले इन बंदियों की अदला-बदली की जा सकती है.
पाकिस्तान का रुख
बीएलए के दावों के विपरीत, पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने कथित तौर पर इस बात से इनकार किया है कि उनका कोई भी जवान लापता है या विद्रोहियों की हिरासत में है, और कैदियों की अदला-बदली की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है. हालांकि, बीएलए ने दोहराया कि बातचीत तुरंत शुरू होनी चाहिए, क्योंकि सात दिन के अल्टीमेटम में केवल दो दिन बचे हैं. विद्रोहियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर बातचीत शुरू नहीं की गई, तो हिरासत में लिए गए जवानों को मौत की सजा दी जा सकती है. अब तक, न तो पाकिस्तानी सेना और न ही शहबाज शरीफ सरकार ने नई वीडियो पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है.
पहले भी नहीं माना पाकिस्तान
संगठन ने कहा कि उसने पहले भी कई बार सैनिकों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था, लेकिन आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की और इस बात से इनकार कर दिया कि वे उसके सैनिक हैं. यहां तक की भारत से 1947, 65 और कारगिल युद्ध के दौरान अपने मारे गए सैनिकों को भी लेने से पाकिस्तान इनकार कर चुका है. अपने भेजे आतंकवादियों को तो खैर पाकिस्तान कभी अपना मानता ही नहीं. हां, ऑपरेशन सिंदूर में चूकि उसी के कब्जे में आतंकवादी मरे तो उसके नेता और सेना के अधिकारी आतंकवादियों को कब्र तक पहुंचाते और दफनाते देखे गए. पाकिस्तान लगातार बलूचिस्तान में अपनी उपस्थिति को "कब्जा" कहे जाने को खारिज करता रहा है और बलूचिस्तान बलूचिस्तान एक आतंकवादी संगठन मानता है. यह अलगाववादी समूह पाकिस्तान में प्रतिबंधित है और संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देशों द्वारा इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है.
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