- पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है
- नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्वागत पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने किया
- आसिम मुनीर पर भारत के पहलगाम हमले की साजिश का आरोप है लेकिन वे अब खुद को शांति का मसीहा साबित करने में लगे हैं
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में चल रही है. इस शांति वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत यूएस के कई शीर्ष नेता और अधिकारी पहुंचे हैं. वहीं ईरान की ओर से भी शीर्ष नेतृत्व इस्लामाबाद पहुंचा है. इस शांति वार्ता के दौरान एक अलग नजारा भी दिखा. दरअसल नूर खान एयरबेस के रनवे पर जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का विमान उतरा, तो उन्हें रिसीव करने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर पहुंचे. आसिम मुनीर ने ही ईरानी डेलीगेट्स का भी स्वागत किया. यह तस्वीरें बताती हैं कि पाकिस्तान में पहलगाम के गुनहगार आसिम मुनीर का कद कितना बढ़ता जा रहा है.
मुनीर के दामन पर खून के छींटे
आसिम मुनीर वही शख्स है, जिस पर भारत के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण हमले की साजिश रचने का गहरा दाग है. वही मुनीर, जिन्हें कल तक सरहद पर खून बहाने वाला जनरल माना जाता था, आज वह खुद को 'शांति का मसीहा' साबित करने की झूठी कोशिश कर रहा है. तस्वीरें देखकर यही लग रहा है कि मुनीर ही अमेरिका और ईरान की शांतिवार्ता की कमान संभाल रहा है.
क्या शहबाज शरीफ से भी ज्यादा बढ़ गया कद?
जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान में लैंड किया, तो सूट-बूट पहनकर आसिम मुनीर ही उन्हें रिसीव करने पहुंचा. चंद घंटे पहले ही ईरानी डेलीगेट्स का स्वागत करने के लिए मुनीर अपनी वर्दी में नजर आया. यह महज कपड़ों का बदलाव नहीं है, बल्कि दुनिया को दिया गया एक संदेश है कि मुनीर अब सिर्फ फौज के सिपहसालार नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अघोषित 'सुपर बॉस' बनता जा रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कहीं पीछे छूट गए हैं. सारा लाइमलाइट आर्मी चीफ और अब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बटोर रहा है.
वर्दी और सूट का खेल
जेडी वेंस को रिसीव करने पहुंचा मुनीर सूट में नजर आया. वहीं इससे ठीक पहले उसने ईरानी संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ और विदेश मंत्री का भी स्वागत किया, इस दौरान वो मिलिट्री यूनिफॉर्म में था. यह एक तरह की अटायर डिप्लोमेसी है. वर्दी में वो अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा था. वहीं काले रंग के फॉर्मल सूट में वो खुद को राजनेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था.
अब सवाल यह है कि आसिम मुनीर अब पाकिस्तान के मुशर्रफ या जिया-उल-हक जैसे पिछले सैन्य तानाशाहों की राह पर है, जहां प्रधानमंत्री सिर्फ एक चेहरा है और असली सत्ता मुनीर के हाथों में है? बहरहाल पहलगाम के दागों को कूटनीति की चमक से धोने की मुनीर की यह कोशिश क्या रंग लाएगी, यह तो वक्त बताएगा.
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