- ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद खाड़ी देशों के तेल-गैस संयंत्रों पर हमलों से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है
- सऊदी ने अमेरिकी सेना को किंग फहद हवाई अड्डे का उपयोग करने की अनुमति दी है, जिससे सैन्य कार्रवाई संभव हुई है
- होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर रोक से खाड़ी देशों के व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भारी नुकसान हो रहा
इजरायल ने जब पिछले हफ्ते ईरान की साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया था, तो बदलने उसने भी कतर के रास लफान प्लांट, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन में ऐसे ही संयंत्रों पर हमला बोला था. मित्र देशों पर हमले से ट्रंप भी टेंशन में हैं और उन्होंने ईरान के एनर्जी प्लांट को निशाना बनाने की धमकी दे डाली है. सऊदी, यूएई, बहरीन, कतर जैसे देशों की नाराजगी की दूसरी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट भी है, जहां तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही रुकने से उनके कारोबार को तगड़ा नुकसान पहुंच रहा है. तेल, गैस के खजाने पर बैठे इन देशों पर जंग में कूदने का दबाव बढ़ता जा रहा है.
1. जहाजों की आवाजाही पर रोक
ईरान-इजरायल युद्ध तेज होने के बीच सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को अरब प्रायद्वीप के किंग फहद हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है. सऊदी अरब ने पहले इससे इनकार किया था. लेकिन जब ईरान ने सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं और राजधानी रियाद पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए तो उसे भी मजबूर होना पड़ा. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर रोक से पड़ोसी देशों का कारोबार प्रभावित हो रहा है.
2. तेल-गैस संयंत्रों पर हमले
सूत्रों के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अब हमलों में शामिल लेने के फैसले के करीब हैं. खाड़ी देशों में तेल-गैस संयंत्रों पर ईरान के सिलसिलेवार हमलों के बाद सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने कहा था कि हमारी सहनशीलता की भी एक सीमा है. यह मानना कि खाड़ी देश जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ हैं, एक गलतफहमी है.
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3. होर्मुज स्ट्रेट पर टोल टैक्स
ईरान का तीसरा भड़काऊ कदम खाड़ी देशों के होर्मुज के रास्ते गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने का है. ईरान ने अरब देशों को संदेश भेजा है कि वो स्वेज नहर के लिए मिस्र की तरह टोल वसूलना चाहता है.
संयुक्त अरब अमीरात उसके देश में ईरान के स्वामित्व वाली संपत्तियों पर कब्जे की कार्रवाई में जुट गया है. वो भी युद्ध में सेना को भेजने पर विचार कर रहा है. वो भी ऐसा युद्धविराम नहीं चाहता, जिससे ईरान फिर ऐसे हमले कर पाने की हिम्मत कर पाए. दुबई में ईरानी अस्पताल और ईरानी क्लब को बंद कर दिया गया है.
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UAE सरकार ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) का जिक्र करते हुए कहा, ईरानी शासन और आईआरजीसी से कुछ संस्थानों को बंद किया जाएगा. दुबई, अबु धाबी समेत यूएई के कई शहरों में ईरान के ड्रोन और मिसाइल अटैक हुए हैं. ईरान की विदेशी मुद्रा और ग्लोबल ट्रेड नेटवर्क पर शिकंजा कसेगा. उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था पहले ही महंगाई और प्रतिबंधों से चरमरा रही है.













