ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत पड़ोसी देशों की कर रहा मदद, श्रीलंका ने 38 हजार टन पेट्रोलियम देने के लिए कहा शुक्रिया

श्रीलंका के सांसद नेता नमल राजपक्षा ने भारत की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत ने ऐसे मुश्किल समय में भी एक दोस्त की तरह हमारे साथ खड़ा रहा है. मैं भारत को 38 हजार टन पेट्रोलियम देने के लिए उनका धन्यवाद करता हूं.

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श्रीलंका ने भारत को कहा शुक्रिया
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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच दुनिया भर के देश में तेल और LPG गैस की किल्लत से दो चार हो रहे हैं. हालांकि, भारत जैसे मित्र देशों के लिए ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया है. भारत में लगातार तेल और LPG की आपूर्ति हो रही है. अभी तक कई जहाज भारत पहुंच भी चुके हैं. लेकिन भारत के कई पड़ोसी देशों में हालात बहुत चिंताजनक है. श्रीलंका भी इन दिनों तेल की आपूर्ति को लेकर चिंतित है. ऐसी स्थिति में श्रीलंका की मदद भारत कर रहा है. 

श्रीलंका के सांसद नेता नमल राजपक्षा ने भारत की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत ने ऐसे मुश्किल समय में भी एक दोस्त की तरह हमारे साथ खड़ा रहा है. मैं भारत को 38 हजार टन पेट्रोलियम देने के लिए उनका धन्यवाद करता हूं.उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की जनता ने एक बार फिर श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम की समय पर आपूर्ति करके 'पड़ोसी पहले' (Neighborhood First) नीति को कायम रखा है.

भारत संकट के समय में श्रीलंका के लिए हमेशा 'सबसे पहले मदद करने वाला' (first responder) देश रहा है—ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति से लेकर आर्थिक सहायता तक जो उसकी 'पड़ोसी पहले' नीति का सच्चा प्रतिबिंब है. एक क्षेत्र के तौर पर, यह ज़रूरी है कि इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए सभी देश रणनीतिक साझेदार के रूप में मिलकर काम करें.

हम श्रीलंका सरकार से आग्रह करते हैं कि वह भारत द्वारा हाल ही में किए गए ईंधन कर (fuel tax) समायोजन जैसे किसी मॉडल पर विचार करे. भारत ने उत्पाद शुल्क (excise duty) में कटौती कीमतों को तुरंत कम करने के लिए नहीं, बल्कि बाज़ार को स्थिर करने और वैश्विक तेल कीमतों में अचानक आए उछाल के दौरान कीमतों को और बढ़ने से रोकने के लिए की थी.

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उन्होंने आगे लिखा कि जैसे-जैसे श्रीलंका आगे बढ़ रहा है, सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों को भी मज़बूत करना चाहिए. जहां राजकोषीय अनुशासन ज़रूरी है, वहीं अत्यधिक कर के बोझ को कम करना—जैसा कि भारत के ज़्यादा विकास-उन्मुख दृष्टिकोण में देखा गया है—निवेश को बढ़ावा देने, नागरिकों पर दबाव कम करने और लंबे समय तक चलने वाली रिकवरी में मदद कर सकता है. यह एक साफ़ याद दिलाता है कि मज़बूत साझेदारियाँ बनाई और सुरक्षित रखी जानी चाहिए, न कि उनका राजनीतिकरण किया जाना चाहिए.

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