मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका गुआम में भेज रहा बी-2 बॉम्बर विमान, आखिर क्या है तैयारी?

एक्सपर्ट और अधिकारी इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्या बी-2 बॉम्बर विमान हिंद महासागर के द्वीप डिएगो गार्सिया पर मौजूद अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर बढ़ेंगे.

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मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच अमेरिका का बड़ा कदम.
नई दिल्ली:

 अमेरिका प्रशांत द्वीप गुआम में बी-2 बॉम्बर विमान (B-2 Bombers) भेज रहा है. जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ इजरायल के हमलों में शामिल होना चाहिए या नहीं. हालांकि यह साफ नहीं है कि बी-2 बॉम्बर विमानों की तैनाती मध्य पूर्व के तनाव से जुड़ी है या नहीं. शनिवार को रॉयटर्स ने दो अधिकारियों के हवाले से ये जानकारी दी.

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भूमिगत लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए बी-2 को किया डिजाइन

बी-2 को अमेरिका के 30,000 पाउंड के GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर को ले जाने के लिए सुसज्जित किया जा सकता है. जिसे गहरे भूमिगत लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वह हथियार है जिसका इस्तेमाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम, जिसमें फोर्डो भी शामिल है, पर हमला करने के लिए किया जा सकता है.

इसे लेकर अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कोई और जानकारी देने से इनकार कर दिया. एक अधिकारी ने कहा कि बॉम्बर को गुआम से आगे ले जाने के लिए अभी तक कोई अग्रिम आदेश नहीं दिया गया है. उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने बी-2 बॉम्बर विमानों को ले जाया जा रहा है. हालांकि पेंटागन ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया.

बॉम्बर को आगे ले जाने के लिए नहीं मिला आदेश

एक्सपर्ट और अधिकारी इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्या बी-2 बॉम्बर विमान हिंद महासागर के द्वीप डिएगो गार्सिया पर मौजूद अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर बढ़ेंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिएगो गार्सिया मध्य पूर्व में संचालन के लिए आदर्श स्थिति में है. पिछले महीने तक डिएगो गार्सिया पर अमेरिका के बी-2 बॉम्बर विमान थे, बाद में उन्हें बी-52 बॉम्बरों से बदल दिया गया.

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इजरायल ने शनिवार को दावा किया कि उसने एक हफ्ते से अधिक समय तक चले हवाई युद्ध में दोनों पक्षों के हमलों के दौरान एक अनुभवी ईरानी कमांडर को मार गिराया, जबकि तेहरान ने कहा कि वह खतरे के दौरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत नहीं करेगा. इजरायल का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की कगार पर है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण मकसद के लिए है. 

अमेरिका इजरायल का साथ देगा या नहीं?

ट्रंप का कहना है कि वह यह तय करने में दो हफ्ते तक का समय लेंगे कि क्या अमेरिका को इजरायल की तरफ से संघर्ष में शामिल होना चाहिए, उन्होंने कहा कि "यह देखने के लिए पर्याप्त समय है कि लोग अपने होश में आते हैं या नहीं."

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रॉयटर्स ने इस हफ्ते सबसे पहले यूरोप में बड़ी संख्या में टैंकर विमानों की आवाजाही और मध्य पूर्व में अन्य सैन्य संपत्तियों की आवाजाही की रिपोर्ट दी थी, जिसमें अधिक लड़ाकू जेट विमानों की तैनाती भी शामिल है. इंडो-पैसिफिक में एक विमानवाहक पोत भी मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है.
 

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