- ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद नई सैन्य नेतृत्व की घोषणा की गई है
- ईरान के नए सेना प्रमुख की नियुक्ति के बाद क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ने की संभावना
- अमेरिका की ओर से जल्द सरेंडर की स्थिति की बात सामने आई है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में बदलाव हो सकता है
अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अटैक से ईरान तमतमा गया है. इस कातिलाना हमले में ईरान ने अपना सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई को भी खो दिया है. ईरान पर हुए इस भीषण हमले के बाद वहां के नए आर्मी चीफ ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहिदी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यूएस जल्द ही सरेंडर करेगा. ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहिदी ने यह भी कहा कि अमेरिका ने बहुत बड़ी गलती की है.
अमेरिका को सीधी धमकी
अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए ईरान के नए सेना आर्मी चीफ ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहिदी ने कहा कि हम इस देश के दुश्मनों को खासकर अमेरिका और जायोनी शासन को यह बात समझा देंगे कि उन्होंने बड़ी गलती की है. यह हम अपने लोगों की ताकत, एकता और सहयोग के दम पर करेंगे. हम अपने उस बुद्धिमान और मजबूत नेता(खामेनेई) के खून की आखिरी बूंद तक चलते रहेंगे, जब तक दुश्मन हार न मान ले.
हमले में ईरान के आर्मी चीफ भी मारे गए
अमेरिका के साथ इजरायल ने करीब 7 बड़े ओहदे में बैठे ईरान की शख्सियतों को मार दिया है. अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के अलावा आर्मी चीफ मोहम्मद पाकपुर(IRGC कमांडर इन-चीफ) भी मारे गए हैं. जिसके बाद अब ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहिदी को ईरान का नया सेना प्रमुख बनाया गया है. इसके अलावा ईरान के रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह, सर्वोच्च नेता के सबसे भरोसेमंद सलाहकार अली शमखानी, सर्वोच्च नेता के सैन्य ब्यूरो के रणनीतिकार मोहम्मद शिराजी, खुफिया तंत्र के मास्टरमाइंड सालेह असदी, SPND के अध्यक्ष होसैन जबल अमेलियन, SPND के पूर्व अध्यक्ष और परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख रणनीतिकार रेजा मोजाफरी-निया भी मारे गए लोगों में शामिल हैं.
ईरान का मिसाइल प्रोग्राम सबसे ताकतवर
ईरान का मिसाइल प्रोग्राम उसकी असली ताकत है. उसने अपनी मिसाइलों की अधिकतम रेंज को करीब 2,000 किलोमीटर तक पहुंचाया है. यह दूरी क्षेत्रीय दुश्मनों जैसे इजरायल तक हमला करने के लिए पर्याप्त मानी जाती है. वहीं शॉर्ट रेंज मिसाइलों में शाहाब-1 और शाहाब-2 शामिल हैं. इनकी मारक क्षमता 300 से 500 किलोमीटर तक है. साथ ही फतेह-110 और जोलफागर जैसी मिसाइलें भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं. इसके अलावा शाहाब-3, सिज्जिल और खोर्रमशहर जैसी मीडियम रेंज मिसाइलें 1,000 से 2,000 किलोमीटर तक हमला कर सकती हैं.
ईरान ने फत्तह-1 और फत्तह-2 जैसी हाइपरसोनिक क्षमता वाली मिसाइलें होने का भी दावा किया है. ये मिसाइलें लक्ष्य के पास पहुंचकर दिशा बदल सकती हैं और बहुत तेज गति से हमला करती हैं. और तो और ईरान के पास क्लस्टर वारहेड वाली मिसाइलें भी हैं. क्लस्टर को ऐसे समझिए जैसे अंगूर के गुच्छे जैसे बम. जो जाते एक साथ हैं, लेकिन फटने के समय मिसाइल से अलग हो जाते हैं. इससे एक ही हथियार से बहुत बड़े इलाके में नुकसान पहुंचाया जा सकता है.
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इसके अलावा खोर्रमशहर-4 मिसाइल को मल्टी वारहेड क्षमता वाला बताया जाता है. इसके अलावा ईरान के हिस्से जो सबसे मारक चीज है, वो है उसकी ड्रोन तकनीक. ये तकनीक ईरान की बड़ी ताकत बन चुकी है. शाहेद-136 जैसे कामिकेज ड्रोन हाल के संघर्षों में इस्तेमाल हुए हैं. शाहेद-129 और मोहाजेर-6 ड्रोन निगरानी और हमले दोनों काम करते हैं. कम लागत में बड़ा नुकसान पहुंचाना इनकी खासियत है.
जमीनी ताकत की बात करें तो ईरान के पास 1,500 से ज्यादा टैंक हैं. करार, जुल्फिकार और टी-72 टैंक सेना का हिस्सा हैं. इसके अलावा रॉकेट सिस्टम और आर्टिलरी गन भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं. हालांकि ईरान की एयरफोर्स अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है. उसके कई फाइटर जेट पुराने हैं, लेकिन उन्हें अपग्रेड करके इस्तेमाल किया जा रहा है. नौसेना पर्शियन गल्फ क्षेत्र में तेज बोट्स और एंटी-शिप मिसाइलों के सहारे काम करती है.
(राजीव रंजन की ओर से दिए इनपुट के साथ)













