- मेवेन क्लाउड एलएलएम पर आधारित एक कमांड-एंड-कंट्रोल तकनीक है, जो सैन्य शाखाओं से खुफिया जानकारी एकीकृत करती है
- अमेरिकी सेना ने मेवेन की मदद से लक्ष्य पहचान, आकलन और नष्ट करने की प्रक्रिया को घंटों से मिनटों में पूरा किया
- मेवेन तकनीक का उपयोग नौ वर्षों से विभिन्न युद्ध अभियानों में हो रहा है और नाटो ने इसे अपनाया है
दुनिया में कहीं एक कंप्यूटर और एक सैनिक ने आपस में बातचीत की और लगभग 900 मिसाइलों ने 12 घंटों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला कर दिया. भले ही ये बातें अलग-अलग लगें, लेकिन ऐसा है नहीं. ये भविष्य के युद्धों की एक झलक है. अब केवल दुश्मन के विमान को मार गिराना या किसी सैन्य अड्डे को निष्क्रिय करना ही काफी नहीं है.
AI और LLM (लघु प्रौद्योगिकी) के युग में युद्ध के समय असीमीत स्पीड की आवश्यकता होती है, और यह जरूरी भी है... अब दुश्मन की जानकारी मिलने और उसके अनुसार अपने प्लान को एक्जीक्यूट करने की स्पीड इतनी तेज होनी चाहिए कि दुश्मन को अवसर ही नहीं मिले.
28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के साथ ऐसा ही हुआ.
पलान्टिर मशीन लर्निंग/आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से रियल टाइम युद्धक्षेत्र का विश्लेषण करने वाले मेवेन स्मार्ट सिस्टम ने सैटेलाइट पिक्चर्स, ड्रोन फुटेज, दुश्मन के संचार को इंटरसेप्ट कर और 150 से अधिक अन्य स्रोतों का विश्लेषण करके पहले ही दिन अमेरिकी सेना के लिए 1,000 से अधिक हमले के विकल्प दे दिए.
फिर भी, गोली चलाने का काम इंसानों ने ही किया; अमेरिकी सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने ब्लूमबर्ग को बताया कि उपयोग में लाई जा रही एआई तकनीक, न केवल मेवेन, बल्कि अन्य तकनीकें भी, सैनिकों को तेजी से और अधिक समझदारी से निर्णय लेने में मदद करती हैं.
अमेरिका ने छह दिनों में 2,000 से अधिक टारगेट पर हमला किया है, जिसमें 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं. इनमें मीनाब में सरकारी लड़कियों के स्कूल की बच्चियां भी शामिल हैं. सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि इस युद्ध ने 2003 में इराक में अपनाई गई अचानक हमले की रणनीति के पैमाने को दोगुना कर दिया है.
मेवन क्या है?
मूल रूप से, एमएसएस एक सी2, या कमांड-एंड-कंट्रोल तकनीक है, जिसकी उत्पत्ति 2017 में पेंटागन के स्कारलेट ड्रैगन नामक कार्यक्रम से हुई थी.
अमेरिकी सेना के 18वें एयरबोर्न कोर ने इसकी नींव रखी थी और इसका उद्देश्य एक ज्वाइंट ऑल डोमेन कमांड एंड कंट्रोल सिस्सटम की दिशा में काम करना था, मतलब एक एकीकृत एआई-संचालित नेटवर्क जो सभी शाखाओं - सेना, नौसेना, वायु सेना और यहां तक कि अंतरिक्ष से प्राप्त खुफिया जानकारी को एकत्रित करता है.
'किल चेन' बनाने में पहले 72 घंटे तक लगते थे, मगर इसके चलते ईरान में हमले के समय किल चेन महज कुछ घंटों में बन गए.
लक्ष्य क्या था? किसी लक्ष्य की पहचान करना, उसका आकलन करना, उस पर हमला करना और उसे मिनटों में नष्ट करना.
भविष्य में युद्ध सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के भोजन तक का मामला हो सकते हैं.
अमेरिकी रक्षा सूत्रों ने इस सप्ताह की शुरुआत में ब्लूमबर्ग को बताया कि आज इसका विकसित वर्जन एंथ्रोपिक के एलएलएम, क्लाउड एआई के अंतर्गत आता है और यह अमेरिकी सैन्य अभियानों, युद्धक्षेत्र और रसद के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बन गया है.
और ऐसा लगता है कि यह अपने मूल उद्देश्य से कहीं आगे विकसित हो गया है.
'किल चेन', यानी लक्ष्यों का चयन करने और उन पर निशाना साधने की पूरी प्रक्रिया, अब 'किल वेब' बन गई है, जो जमीन, समुद्र या हवा में मौजूद कई हथियार प्लेटफार्मों को सपोर्ट करने वाले जटिल और परस्पर जुड़े सेंसरों को जोड़ती है.
मेवन का 'दिमाग', क्लाउड एआई
पलान्टिर टेक्नोलॉजीज, इंक. द्वारा विकसित, मेवन को क्लाउड एलएलएम पर बनाया गया था.
पलान्टिर का सॉफ्टवेयर अब पेंटागन के सैन्य अभियानों में एआई को एकीकृत करने के अभियान में इतना गहराई से समाहित हो गया है कि इसने कंपनी को अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण प्रयासों में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया है और इसके बाजार मूल्य को लगभग 350 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा दिया है.
टारगेट पूरा करने के लिए युद्धक्षेत्र डेटा का कंप्यूटर विश्लेषण नया नहीं है, लेकिन बोलने वाले चैटबॉट नये हैं, और क्लाउड यही करता है.
याद रखिए, यह वही क्लाउड है, जिसका इस्तेमाल आप ईमेल लिखने के लिए करते हैं या कोई बच्चा स्कूल के लिए बुक रिपोर्ट लिखने के लिए करता है.
यह सब नवंबर 2025 में शुरू हुआ, जब एंथ्रोपिक और पैलेंटिर ने क्लाउड को एक 'रीजनिंग इंजन' में बदलने के लिए हाथ मिलाया, जो सेना के लिए निर्णय-सहायता प्रणाली के रूप में काम कर सके.
एंथ्रोपिक बनाम ट्रंप
मगर फरवरी 2026 में स्थिति तब बिगड़ गई, जब अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक से सुरक्षा उपायों को हटाने, यानी उपयोग पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करने की मांग की. एंथ्रोपिक ने दुरुपयोग के डर का हवाला देते हुए 'ना' कर दिया, जिसमें आम नागरिकों की बड़े पैमाने पर (और अवैध) इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सैन्य परिवेश में पूरी तरह से स्वायत्त हथियार, यानी 'किल चेन' में मानवीय निगरानी को हटाना शामिल था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे प्रभावित नहीं हुए और उन्होंने संघीय कर्मचारियों को एंथ्रोपिक उत्पादों का उपयोग बंद करने का आदेश दिया तथा छह महीने के भीतर इसे सैन्य तकनीक से हटाने की मांग की. वो कहते हैं, "हमें इसकी जरूरत नहीं है, हम इसे नहीं चाहते, और हम इनके साथ फिर कभी व्यापार नहीं करेंगे!" ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में एंथ्रोपिक के इस फैसले को "भयानक गलती" बताया.
लेकिन पिछले हफ्ते एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अपने विरोध को दोहराते हुए समझाया कि आज की एआई प्रणालियां .पूरी तरह से स्वायत्त हथियारों को शक्ति प्रदान करने के लिए पर्याप्त रूप से विश्वसनीय नहीं हैं. उन्होंने कहा, "हम जानबूझकर ऐसा कोई उत्पाद प्रदान नहीं करेंगे, जो अमेरिका के सैनिकों और नागरिकों को खतरे में डाले... उचित निगरानी के बिना, पूरी तरह से स्वायत्त हथियारों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता... उन्हें उचित सुरक्षा उपायों के साथ तैनात किया जाना चाहिए, जो आज मौजूद नहीं हैं."
यह लड़ाई अभी भी जारी है.
आलोचकों का कहना है कि एंथ्रोपिक की बात में दम है.
मेवेन से पहले, इजरायली सेना ने 2024 में गाजा में 37,000 से अधिक टारगेट का प्रोफाइल बनाने के लिए लैवेंडर नामक एक एआई-सहायता प्राप्त कार्यक्रम का इस्तेमाल किया था. इसका परिणाम अच्छा नहीं रहा. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने तेल अवीव की इस अप्रमाणित तकनीक के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की और इसे 'युद्ध अपराध' और 'एआई-सहायता प्राप्त नरसंहार' करार दिया.
फिर यह बात सामने आई कि इजरायली सेना ने आंतरिक रूप से यह तय किया था कि 'हमास के प्रत्येक कार्यकर्ता की हत्या के लिए 15-20 नागरिकों को मारना भी जायज है.
क्या मेवेन का अंत होगा?
नहीं.
अमेरिका ने इस तकनीक में, भले ही मेवन में नहीं, पहले से ही भारी निवेश किया हुआ है, और भविष्य निस्संदेह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित है. वाशिंगटन पोस्ट ने शायद इसे सबसे सटीक ढंग से व्यक्त किया है, एक अज्ञात सूत्र का हवाला देते हुए कहा है कि ईरान में अभियान चला रहे सैन्य कमांडर इस पर "बहुत निर्भर" हो गए हैं.
लेकिन यह सिर्फ ईरान तक ही सीमित नहीं है. दरअसल, मेवन या इसके पूर्व संस्करणों का उपयोग अमेरिकी सेना द्वारा पिछले नौ वर्षों से किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत सोमालिया में इस्लामी आतंकवादी समूह अल-शबाब के खिलाफ हमलों से हुई थी. फरवरी 2024 में इराक और सीरिया में हमलों की योजना बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया गया था.
इसका उपयोग 2021 में अफगानिस्तान में एक नागरिक बचाव अभियान में और रूस के यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के दौरान भी किया गया था, जो संभावित रक्षात्मक या गैर-सैन्य उपयोग के परिदृश्यों को रेखांकित करता है.
और, पिछले साल अप्रैल में नाटो ने मेवन को खरीदने के लिए पैलेंटिर के साथ एक समझौता किया, जिसका अर्थ है कि अमेरिका के पास AI-सहायता प्राप्त युद्धक्षेत्र प्रबंधन के आगे के विकास को छोड़ने की कोई योजना नहीं है.
हालांकि, सावधानी बरतने के अलावा किसी और बात पर निष्कर्ष निकालना अनुचित होगा.














