- अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में लोग नदियों में सोने की धूल निकालकर अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं
- कुनार नदी के पत्थरीले तल में लोग दिनभर मेहनत कर बेहद छोटे सोने के कण ढूंढते हैं
- कुनार के ग्रामीण इलाके में लोग पारंपरिक तरीकों से खुदाई कर नदी के पानी से पत्थरों को छानकर सोना अलग करते हैं
Afghanistan and search of gold dust: अफगानिस्तान में बेरोजगारी और कम आमदनी वाले पेशों के कारण लोग नए-नए तरीके अपनाकर पैसा कमाने की कोशिश कर रहे हैं. खासकर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग अब नदियों में सोना ढूंढकर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं. यह काम आसान नहीं है, क्योंकि इसमें बहुत मेहनत लगती है और अक्सर बहुत कम सोना मिलता है. फिर भी, काम की कमी के कारण लोग यह जोखिम उठाते हैं. अफगानिस्तान के कुनार इलाके में सैकड़ों लोग नदी के सूखे हिस्सों और पहाड़ों में दिनभर मेहनत करके थोड़ी-सी सोने की धूल (गोल्ड डस्ट) इकट्ठा करते हैं, ताकि अपने परिवार का खर्च चला सकें.
कुनार नदी में सोना छानते लोग
अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में हिंदू कुश पहाड़ों के बीच, सैकड़ों लोग कुनार नदी के पत्थरीले तल में खुदाई कर रहे हैं, ताकि कुछ ग्राम सोने की धूल मिल सके और उन्हें कमाई का एक जरिया मिल जाए. ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के नीचे, जिनमें से कुछ अप्रैल में भी बर्फ से ढके हुए हैं, ये लोग पाकिस्तान सीमा के पास मेहनत करते हैं, ताकि उन्हें सोने के छोटे-छोटे चमकदार कण मिल सकें. यह उस देश में हो रहा है जहां मजदूरी बहुत कम है.
कुनार प्रांत के खरवालू इलाके में, मिट्टी के घरों और छोटे-छोटे गेहूं के खेतों वाले गांव के नीचे, लोग नदी के सूखे हिस्से में खोदाई करते हैं. फिर वे नदी के पानी से पत्थरों को छानकर सोना ढूंढते हैं. 45 साल के दिलावर भी इनमें से एक हैं. उन्होंने काबुल में मजदूरी का काम छोड़ दिया और अब घर से 7 घंटे दूर यहां आ गए. आठ बच्चों के पिता दिलावर ने कहा, “देश में ज्यादा नौकरी नहीं है, इसलिए हमने खुद ही अपने लिए काम बना लिया है.”
लेकिन उन्होंने यह भी कहा, “जो सोने के टुकड़े हमें मिलते हैं, वे अक्सर गेहूं के दाने से भी छोटे होते हैं.” नदी के नीचे की तरफ, गाजीआबाद इलाके में, सैकड़ों लोग हथौड़े और औजारों से पत्थरीले तल तोड़ रहे हैं. फिर वे पत्थरों की बोरियां पीठ पर उठाकर ढलान से नीचे लाते हैं और उन्हें छलनी में डालकर सोना अलग करते हैं.
कुछ लोग लंबे लकड़ी के डंडों से जुड़े पीले डिब्बों में नदी का पानी भरते हैं और उसे छलनी पर डालते हैं, ताकि छोटे पत्थर नीचे फिसल जाएं और उनमें से सोने के कण अलग हो सकें. कभी-कभी दो बार और छानने के बाद धातु के बर्तन में सोने का छोटा टुकड़ा दिख जाता है.
35 साल के गुल अहमद जान ने कहा कि वह एक हफ्ते में अच्छी कमाई कर लेते हैं. उन्होंने कहा, “हम लगभग 1 ग्राम तक सोना निकाल लेते हैं,” जिसकी कीमत करीब 8,000 अफगानी (लगभग 12 हजार रुपए) तक हो सकती है.
अफगानी लोगों की मजबूरी
अफगानिस्तान में लंबे समय तक चले युद्ध के कारण प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाया है. हालांकि, कुनार के एक अधिकारी ने कहा कि यहां एक दशक से ज्यादा समय से लोग इस तरह सोना ढूंढ रहे हैं. प्रांत के सूचना प्रमुख नजीबुल्लाह हनीफ ने कहा कि स्थानीय लोगों ने यह तरीका उन खनिकों (माइनर्स) से सीखा जो सोना वाले इलाकों से यहां आए थे.
उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने मशीनों से खुदाई शुरू कर दी थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने इस्लामिक अमीरात (अफगानिस्तान की सरकार) से शिकायत की, क्योंकि इससे नदी और पहाड़ को नुकसान होता है.” उन्होंने अनुमान लगाया कि कुनार में हजारों लोग पारंपरिक तरीके से सोना निकाल रहे हैं, जिसे सरकार ने अनुमति दी है. हाल के वर्षों में अफगानिस्तान के संसाधनों में देश और विदेश के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है. तालिबान सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में खनन (माइनिंग) को बढ़ावा दे रही है.














