आखिर क्यों गिरी 5 मंजिला सत्य निकेतन बिल्डिंग? ये है वजह!

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  • प्रकाशित: सितम्बर 07, 2026

55 वर्ग गज यानि एक छोटी कार जितनी जगह पर दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला डेथ ट्रैप खड़ा कर दिया गया था. वर्टिकल लोडिंग पर दर्जनों छात्रों का बोझ लादकर इसे ‘हॉस्टल डेज’ जैसी ब्रांडिंग से प्रति बेड 14 से 18 हजार रुपये महीने पर बेचा जा रहा था. ग्राउंड रिपोर्ट में NDTV की संवाददाता जयश्री पुरंदरे मोबाइल की रोशनी में अंदर गईं तो दूसरा फ्लोर आते-आते घुप अंधेरा, सांस लेना मुश्किल और घुटन भरा माहौल मिला. छोटे से कमरे में 3 छात्र- आशुतोष यादव जैसे छात्र खुद हैंगर लाकर कपड़े टांगते हैं, अलमारी, फ्रिज, पानी कुछ नहीं, एक छोटा कूलर भी खुद रेंट पर लाए हैं. लाइट जाते ही पूरा ब्लैकआउट हो जाता है. यह पढ़ाई का माहौल नहीं, मुर्गियों को ठूंसने वाला पोल्ट्री फार्म है।छात्रों ने बताया AC और Non-AC में 5-6 हजार का फर्क है, AC का स्टार्टिंग प्राइस 15 हजार प्रति स्टूडेंट है. एक रूम में 2-3 बेड डालकर एक रूम से 45-50 हजार वसूला जा रहा है, बिजली सरकारी 8 रुपये यूनिट के बजाय 15 रुपये ली जाती है, पानी का अलग.