सत्य निकेतन का अर्थ है घर, जहाँ सपने सांस लेते हैं, लेकिन दिल्ली के साउथ कैंपस से सटा यह इलाका अब सपनों का नहीं, मुनाफे के लालच, सिस्टम के अंधेपन और भ्रष्टाचार के गुनाहों का निकेतन बन गया है. 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 छात्रों की मौत पर ग्राउंड जीरो पर बेबस आंखें अपनों को ढूंढ रही थीं. एक बिलखती मां ने बताया - 12 बजे वीडियो कॉल पर बेटे से आखिरी बात हुई, 2 बजे फोन नहीं उठा. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ से मां-बाप ने अफसर बनने के सपने लेकर बच्चे दिल्ली भेजे थे. देवास के परिवार ने इकलौते 19 साल के बेटे अर्पित को RRSD कॉलेज में B.Com सेकंड ईयर करने भेजा था, उसके सपने मलबे में दम तोड़ गए. दुर्ग (छत्तीसगढ़) के 20 साल के युवराज सोनी मोतीलाल नेहरू कॉलेज में B.Com कर रहा था, रक्षाबंधन मनाकर 3 दिन पहले ही लौटा था, फोन पर बात करते हुए इमारत गिरी. मरने वालों में सोनभद्र के 20 साल के अभिषेक, औरैया के 17 साल के पवन, दुर्ग के युवराज, देवास के अर्पित और कटनी के 18 साल के अक्षत सिंह यादव शामिल हैं. छात्रों ने बताया- यहां स्लम जैसी हालत है, एक घंटे बारिश में घुटने भर पानी, सामने की सड़क तालाब, खाने की खराब कंडीशन, गंदा पानी, 10x10 के छोटे कमरों में 3-3 छात्र ठूंसना. किराया 12-13 हजार सिर्फ रहने का, खाना अलग, बिजली अलग, याद करने की जगह का अलग. ब्रोकर हर चीज में है- खाना, पानी, रूम, कोचिंग सब में. UPI नहीं, सिर्फ कैश लेते हैं, 15% से 50% तक, 15 दिन से एक महीने तक का कमीशन वसूलते हैं.