दिल्ली के सत्य निकेतन में 55 वर्ग गज के छोटे से प्लॉट पर बनी 5 मंजिला इमारत के गिरने से 7 छात्रों की मौत ने सिस्टम की पोल खोल दी है. यह इमारत 55 गज का डेथ ट्रैप थी, जहां प्रति बेड 14 से 18 हजार किराया वसूला जा रहा था।ग्राउंड जीरो पर NDTV की पड़ताल में सामने आया कि हादसे में मारे गए छात्र देश के कोने-कोने से सपने लेकर आए थे - सोनभद्र के 20 साल के अभिषेक, औरैया के 17 साल के पवन, दुर्ग के 20 साल के युवराज सोनी जो 3 दिन पहले रक्षाबंधन मनाकर लौटा था, देवास के 19 साल के इकलौते बेटे अर्पित और कटनी के 18 साल के अक्षत सिंह यादव. एक मां ने बताया 12 बजे वीडियो कॉल पर बात हुई, 2 बजे फोन नहीं उठा. नियमों के मुताबिक, 50 sqm (60 गज) से छोटे प्लॉट पर सिर्फ ग्राउंड+2 यानी 3 मंजिल की इजाजत है, 5 मंजिल के लिए ग्राउंड पर स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य है. लेकिन यहां बिना नक्शा, बिना फायर एग्जिट, बिना सेफ्टी के 5 मंजिल खड़ी हो गई. CSE और तेजेंद्र खन्ना कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की 70-80% इमारतें नियम तोड़ रही हैं, बिल्डर ग्राउंड फ्लोर की मंजूरी लेकर ऊपर अवैध मंजिलें बना देते हैं और MCD की मिलीभगत के बिना यह मुमकिन नहीं.