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सवाल इंडिया का : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'लोक कल्याण का तरीका सिर्फ मुफ्त उपहार नहीं हो सकता'

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चुनावों के समय सरकारे जो लोकलुभावन घोषणाएं करती हैं उन्हें जनता के लिए जरूरी माना जाए या उसे रेवडियां माना जाए. जिनकी वजह से देश पर आर्थिक बोझ बढता जाता है.  ये सवाल आज भी सुप्रीम कोर्ट में उठा. इन पर रोक लगाने के लिए वकील अश्विनी उपाध्याय की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ये चिंता और विचार का विषय है.



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