पुणे के पास लोहगढ़ किले की वो 400 फीट गहरी खाई सिर्फ केतन अग्रवाल की मौत की गवाह नहीं, बल्कि वो गवाह थी एक ऐसी खूनी साजिश की जिसे इंटरनेट के बंद कमरों में हफ्तों तक बुना गया. आमतौर पर अपराधी वारदात के बाद सुराग छोड़ते हैं. लेकिन इस मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल ने वारदात से पहले ही अपने डिजिटल फूटप्रिंट छोड़ दिए थे. पुणे पुलिस के साइबर एक्सपर्ट्स जब सिया गोयल के दोनों मोबाइल फोन्स का डाटा खंगाल रहे थे, तो उन्हें शायद अंदाजा नहीं था की उन्हें साजिश की एक पूरी डिजिटल लाइब्रेरी मिल जाएगी. वारदात से हफ्तों पहले जब सिया और केतन की शादी की शहनाईयाँ बजने की तैयारियां हो रही थी, ठीक उसी वक्त सिया का दिमाग इंटरनेट पर क्राइम थ्रिलर के उस हिस्से को सर्च करने में जुटा था जहां कानून की नजरों से बचा जा सके. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिया की सर्च हिस्ट्री से कुछ ऐसी कड़ियां मिली हैं, जो इसकी साइकोलॉजी को पूरी तरह बेनकाब करती है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिया ने इंटरनेट पर सर्च किया था की भारत में वो कौन-से मर्डर केस है, जिनमें लाश कभी नहीं मिली या कातिल कभी पकड़ा नहीं गया. इसी सर्च के दौरान उसकी नजर इंदौर के राजा रघुवंशी हत्या कांड पर पड़ी, जहां साजिश और धोखे की मिलती जुलती कहानी थी.