सुचारिता कुकरेती के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में सैफुद्दीन सोज ने बेहद बेबाकी से कश्मीर और धारा 370 हटाने को लेकर अपनी दलीलें दीं. सोज का कहना है कि कश्मीर के लोगों ने हमेशा से भारत के संविधान को दिल से माना है और देश के साथ विलय को स्वीकार किया था. लेकिन केंद्र सरकार ने एकतरफा फैसला लेकर धारा 370 को हटा दिया, जिसे कश्मीर के लोग एक 'धोखे' के तौर पर देखते हैं और उनके मन में इसे लेकर भारी मलाल है.
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या विकास, सड़कों, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं कश्मीर तक पहुंचाना केंद्र की जिम्मेदारी नहीं थी? तो सोज ने कहा कि विकास का आर्टिकल 370 से कोई लेना-देना नहीं है. विकास करना तो हर चुनी हुई सरकार का फर्ज है. उन्होंने कश्मीर को भारत का अटूट हिस्सा बताते हुए कहा कि 1952 के दिल्ली समझौते के तहत जो स्वायत्तता कश्मीर को दी गई थी, उसे वापस दिया जाना चाहिए. सोज ने कश्मीर के युवाओं से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहें.