तालाबंदी का चौथा चरण शुरू हो चुका है. पहले चरण से ही हम दिखा रहे हैं कि किन हालात में मजदूर अपने घर जाने को मजबूर हुए. वे पैदल चलते चले गए लेकिन व्यवस्था को कोई फर्क नहीं पड़ा. पर फर्क पड़ा है तो राजनीति को लेकर. एक पक्ष प्रियंका गांधी हैं जो बसें देना चाहती हैं और दूसरा पक्ष यूपी सरकार है जो बसों का फिटनेस टेस्ट कराना चाहती है. तीसरा पक्ष जो मजदूर है और मजबूर है. आज भी 19 मई को देश के अलग-अलग हिस्सों में 15 से ज्यादा मजदूरों की दुर्घटना में मौत हो गई लेकिन राजनीति सुरक्षित है.