लखनऊ. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. शुरुआती जानकारी और सामने आ रहे दावों के मुताबिक, प्रतीक पिछले कुछ समय से अपने कारोबार को लेकर भारी तनाव में थे. उनकी मौत के पीछे कारोबारी नुकसान, साझेदारी विवाद और मानसिक दबाव जैसे कई पहलुओं को कारण माना जा रहा है.
प्रतीक यादव ने राजनीति से दूर रहते हुए फिटनेस और रियल एस्टेट के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की. उन्होंने एक फिटनेस क्लब शुरू किया और साथ ही रियल एस्टेट के कारोबार में भी कदम रखा. हालांकि, सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल में उन्हें इस व्यवसाय में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा. बताया जा रहा है कि उनके कई प्रोजेक्ट घाटे में चले गए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और मानसिक स्थिति पर असर पड़ा.
रियल एस्टेट के कारोबार में प्रतीक अपने बिजनेस पार्टनर्स के साथ लगातार विवादों का सामना कर रहे थे. बताया जाता है कि उनकी पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन बिष्ट उनके कारोबारी साझेदार थे. साल 2012 में अमन बिष्ट ने करीब 17 कंपनियां रजिस्टर कराई थीं, जिनमें अधिकांश रियल एस्टेट से जुड़ी थीं. हालांकि जिम्मेदारी अमन के पास थी, लेकिन अंदरूनी फैसलों में प्रतीक की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है.
सूत्रों के अनुसार, बीते एक साल में लगातार नुकसान के बाद प्रतीक और अमन के रिश्तों में खटास आ गई. विवाद इतना बढ़ गया कि प्रतीक ने अमन को अपना जिम खाली करने तक को कह दिया. इतना ही नहीं, पिछले साल अमन बिष्ट के खिलाफ करीब 14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज कराया गया था.
इसी तरह, एक अन्य कारोबारी कृष्णानंद के साथ भी प्रतीक का गंभीर विवाद सामने आया. आरोप है कि कृष्णानंद ने उनसे करोड़ों रुपये का निवेश लिया और रकम वापस मांगने पर उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी. प्रतीक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पोक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकियां दी गई थीं. इस मामले में भी उन्होंने लखनऊ में FIR दर्ज कराई थी.
करीब दो महीने पहले जब अखिलेश यादव ने प्रतीक से मुलाकात की थी, तब भी वे अपने कारोबार को लेकर बेहद चिंतित और तनाव में थे. अखिलेश यादव ने उस वक्त उन्हें सलाह दी थी कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और कारोबार को लेकर परेशान न हों, क्योंकि व्यापार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है.
परिवार के करीबी लोगों और चिकित्सकों का भी कहना है कि प्रतीक यादव लंबे समय से तनाव और एंग्जायटी से जूझ रहे थे. वे अपने करियर को सफल बनाने की कोशिश में लगे थे, लेकिन लगातार नुकसान और विवादों ने उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर दिया.
इस बीच, इस पूरे मामले में साजिश की आशंका भी जताई जा रही है. कुछ लोगों का मानना है कि जिस तरह से घटनाक्रम सामने आया, उसमें कई सवाल अनुत्तरित हैं. ऐसे में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है ताकि सच सामने आ सके. प्रतीक यादव की मौत अब सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसा मामला बन गया है जिसमें कारोबार, रिश्ते, तनाव और संभावित साजिश—सभी एंगल की जांच जरूरी हो गई है.