देश का एक बड़ा हिस्सा इस समय प्रकृति के दोहरे मिजाज और मॉनसूनी विनाश की चपेट में है। जहां एक तरफ पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के कई शहर और गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुके हैं और सड़कें नदियों का रूप ले चुकी हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के कुछ हिस्सों में मानसून की कछुआ चाल ने सूखे का खतरा पैदा कर दिया है।