बाल विवाह आज भी लाखों बच्चों से उनका बचपन और भविष्य छीन लेता है. शादियां तो नए जीवन की शुरुआत का जश्न होनी चाहिए लेकिन कई बच्चों के लिए अक्षय तृतीया, वह दिन बन जाता है जब उनका बचपन खत्म हो जाता है. हालांकि, पूरे भारत में, जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीमें इसके खिलाफ़ लड़ रही हैं. 270 से ज़्यादा NGO, वुमेन लीडर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्थानीय अधिकारी बाल विवाह को रोक रहे हैं. इसके लिए वे जागरूकता फैला रहे हैं, राष्ट्रीय हेल्पलाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं साथ ही साथ वे रोक लगाने के आदेश (injunctions) दायर कर रहे हैं और साल भर बच्चों की सुरक्षा कर रहे हैं.