नई दिल्ली: योग गुरु और पतंजलि समूह के संस्थापक स्वामी रामदेव ने हालिया एक इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों, भ्रामक विज्ञापन विवाद, आयुर्वेद‑एलोपैथी बहस, राजनीति में भूमिका, टैक्स सिस्टम और धर्म से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी.
“कोर्ट में साबित किया है, माफी क्यों मांगूं?”
स्वामी रामदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके विज्ञापनों को भ्रामक बताए जाने के आरोपों को वह सिरे से खारिज करते हैं. उनका कहना है कि उन्होंने कोर्ट में माफी नहीं मांगी क्योंकि उनके पास अपने दावों के “पूरा वैज्ञानिक और प्रायोगिक प्रमाण” हैं. उन्होंने दावा किया कि वह पहले ऐसे बाबा हैं जिन्हें अपने दावों को लेकर कोर्ट में पेश होना पड़ा.
गंभीर बीमारियों को ठीक करने के दावे
रामदेव ने ऑन‑कैमरा यह दोहराया कि उनकी संस्थाएं कैंसर, लिवर फेल्योर, किडनी फेल्योर, टाइप‑1, 2 और 3 डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, ऑटोइम्यून बीमारियों सहित कई जटिल रोगों के इलाज में सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि ये दावा वह खुले तौर पर करते हैं और इसके प्रमाण मौजूद हैं.
एलोपैथी बनाम आयुर्वेद
एलोपैथी पर टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि फार्मा कंपनियों का मॉडल “लाभ केंद्रित” है, जबकि पतंजलि का मॉडल “अर्थ से परमार्थ” का है. रामदेव के अनुसार, पतंजलि की कमाई सेवा, शिक्षा और सामाजिक कार्यों में लगाई जाती है और वह स्वयं कोई लाभांश नहीं लेते.