UCC: लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे जोड़ों की सुरक्षा का क्या? नैनीताल HC ने उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब

UCC: नैनीताल हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि UCC कानून के तहत महिलाओं और लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ उत्पीड़न और अन्य घटनाओं को बढ़ावा मिलेगा.

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समान नागरिक संहिता कानून पर नैनीताल हाई कोर्ट में सुनवाई.
नैनीताल:

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून (Uttarakhand Uniform Civil Code) 27 जनवरी 2025 से लागू हो चुका है. लेकिन कई लोगों को UCC कानून के कई प्रावधानों पर आपत्ति है. इन प्रावधानों को चुनौती देते हुए नैनीताल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इसमें लिव इन रिलेशनशिप में निजता के हनन को लेकर याचिका भी शामिल है. गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे जोड़ो की सुरक्षा पर जवाब मांगा. सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 1 अप्रैल तक का समय दिया गया है. नैनीताल हाई कोर्ट 1 अप्रैल को इस केस से जुड़े अन्य मामलों पर सुनवाई करेगी. 

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर क्या हैं नियम?

  • शादियों के अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन एक महीने के भीतर करवाना होगा. 
  • लोगों को इसके लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे
  • UCC के पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकेगा. 
  • रजिस्ट्रेशन न करवाने या गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल, 25 हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
  • लिव-इन रिलेशनशिप को खत्म करने के लिए एक या दोनों साथी ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं.
  • अगर एक साथी आवेदन करता है, तो रजिस्ट्रार दूसरे साथी द्वारा पुष्टि करने के बाद ही इसे खत्म करने का फैसला करेगा. लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान अगर महिला प्रेग्नेंट होती है तो बच्चे के जन्म के 30 दिन के भीतर इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को देनी होगी. 
  • ऐसे बच्चों को भी पूरी तरह से अधिकार मिलेंगे.

सुरक्षा और निजता की कानूनी सुरक्षा की मांग

नैनीताल हाई कोर्ट में समान नागरिक संहिता के प्रावधानों के खिलाफ जनहित याचिका उत्तराखंड महिला मंच और समाजवादी लोकमंच की तरफ से दाखिल की गई थी. उन्होंने लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की सुरक्षा और उनके निजता की कानूनी सुरक्षा की मांग की है. अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील ने कहा कि यूसीसी कानून संवैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है. इस कानून के जरिए सरकार लोगों की निजी जिंदगी में दखल देते हुए निगरानी रखने की कोशिश कर रही है. 

कपल की सुरक्षा पर सरकार से जवाब तलब

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि  इस कानून के तहत महिलाओं और लिवइन रिलेशनशिप के खिलाफ उत्पीड़न और अन्य घटनाओं को बढ़ावा मिलेगा. पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे जोड़ों की सुरक्षा पर भी सरकार से जवाब मांगा है. अदालत अब अगली सुनवाई 1 अप्रैल को करेगी. 

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उत्तराखंड UCC कानून क्या है?

उत्तराखंड सरकार ने 27 जनवरी 2025 को UCC कानून लागू किया था. यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है. इस कानून में शादी, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कानून हैं. यूसीसी कानून लागू होने के बाद अब उत्तराखंड में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कानून प्रभावी नहीं होगा.

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