केदारनाथ धाम में ग्रीन यात्रा! प्लास्टिक वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण, बेलिंग मशीन-MRF सेंटर से बदलेगी तस्वीर

केदारनाथ धाम में 2026 की यात्रा इस बार ग्रीन यात्रा के रूप में नई मिसाल पेश कर रही है. जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग ने प्लास्टिक वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए बेलिंग मशीन और एमआरएफ सेंटर की व्यवस्था की है. सूखे कचरे का संग्रह, वर्गीकरण और रीसाइक्लिंग कर धाम को स्वच्छ और पर्यावरण‑अनुकूल बनाया जा रहा है.

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Kedarnath green yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम 2026 में इस वर्ष यात्रा सिर्फ आस्था की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की भी मिसाल बन रही है. ग्रीन यात्रा के संकल्प के साथ जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग ने ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर ऐसी पहल की है, जिससे धाम की प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता दोनों सुरक्षित रहें. लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए आधुनिक और व्यावहारिक कदम उठाए जा रहे हैं.

रुद्रप्रयाग से रोहित डिमरी की रिपोर्ट...

प्रशासन की ग्रीन सोच, मजबूत तैयारी

केदारनाथ यात्रा मार्ग से लेकर धाम क्षेत्र तक जिला प्रशासन ने साफ‑सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. हर साल बढ़ती भीड़ के बीच कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होता है, लेकिन इस बार सुनियोजित व्यवस्था और तकनीक के सहारे इसे नियंत्रित किया जा रहा है. प्रशासन का साफ संदेश है तीर्थ यात्रा स्वच्छ भी हो और प्रकृति के अनुकूल भी.

प्लास्टिक वेस्ट के लिए वैज्ञानिक व्यवस्था

प्लास्टिक और अन्य सूखे कचरे के निस्तारण के लिए नगर पंचायत केदारनाथ द्वारा वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है. खुले में कचरा फेंकने की बजाय अब उसे इकट्ठा कर प्रोसेस किया जा रहा है, जिससे प्रदूषण पर कंट्रोल के साथ‑साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है.

बेलिंग मशीन से आसान हुआ ड्राई वेस्ट मैनेजमेंट

इस पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा बनी है बेलिंग मशीन. इसके जरिए प्लास्टिक और सूखे कचरे को दबाकर बेल्स बनाई जा रही हैं. इससे कचरे का भंडारण, ढुलाई और रीसाइक्लिंग तीनों काम आसान हो गए हैं. कम जगह में ज्यादा कचरा सुरक्षित तरीके से रखा जा सकता है, जो पहाड़ी क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है.

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एमआरएफ सेंटर बना स्वच्छता की रीढ़

नगर पंचायत केदारनाथ में स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर इस अभियान की बड़ी उपलब्धि है. नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती के अनुसार, यह सेंटर पिछले साल ही हीलिंग हिमालयन फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किया गया था. यहां सूखे कचरे को इकट्ठा कर उसकी छंटाई और रीसाइक्लिंग की जाती है.

कचरे से आमदनी, स्वच्छता को आर्थिक संबल

अब तक लगभग 500 किलो सूखा कचरा प्रोसेस कर बेल्स के रूप में तैयार किया जा चुका है. इन बेल्स की बिक्री से नगर पंचायत को 15 से 20 हजार रुपये तक की आय होने की संभावना है. इससे साफ‑सफाई अभियान को न सिर्फ मजबूती मिल रही है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भी बन रहा है.

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15 कैटेगरी में कचरे का वर्गीकरण

कचरे के बेहतर निस्तारण के लिए उसे करीब 15 अलग‑अलग श्रेणियों में बांटा जा रहा है. इससे रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और असरदार हो गई है. हर तरह के कचरे का सही तरीके से इस्तेमाल या निस्तारण संभव हो पा रहा है. इन निरंतर प्रयासों से केदारनाथ धाम को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने में बड़ी सफलता मिल रही है. यह मॉडल देश के अन्य बड़े तीर्थ स्थलों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है, जहां हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील

प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान सफाई का ध्यान रखें, प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करें और कचरा तय स्थानों पर ही डालें. “ग्रीन केदारनाथ, स्वच्छ केदारनाथ” अभियान से जुड़कर हर यात्री इस पावन धाम की गरिमा और प्रकृति की रक्षा में अपना योगदान दे सकता है.

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