- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी की करतूत से पति कमाने में असमर्थ हो तो गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा
- कोर्ट ने कुशीनगर परिवार अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए पत्नी की गुजारा भत्ता याचिका खारिज की
- पति की कमाई क्षमता पत्नी के परिवार के आपराधिक कृत्यों के कारण प्रभावित हुई, इस स्थिति में भत्ता अनुचित होगा
ऐसा माना जाता है कि पत्नी से अलग होने के बाद पति को गुजारा भत्ता देना ही होगा. अदालतें भी ऐसे मामलों में पत्नी के प्रति नरम रुख रखती हैं. लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने फैसले में कहा है कि यदि पत्नी की करतूत या कार्यों से उसका पति कमाने में अक्षम हो जाता है, तो इस स्थिति में वह उससे गुजारा भत्ते का दावा नहीं कर सकती. न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला ने इस टिप्पणी के साथ विनीता नाम की एक महिला की याचिका खारिज कर दी जिसने अपने पति से गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की थी.
गुजारा भत्ते का आदेश देना भारी अन्याय होगा...
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कुशीनगर की परिवार अदालत के फैसले को सही करार दिया, जिसमें निचली अदालत ने पत्नी के गुजारा भत्ता के आवेदन को खारिज कर दिया था. अदालत ने कहा कि इस तरह के मामले में गुजारा भत्ते का आदेश देना भारी अन्याय होगा खासकर तब, जब पत्नी के परिवार वालों के आपराधिक कृत्य से पति के कमाने की क्षमता बर्बाद हो गई. पत्नी की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, 'जहां भारतीय समाज आमतौर पर एक पति से काम करने और अपने परिवार का भरण पोषण करने की अपेक्षा रखता है, इस मामले ने अनूठी परिस्थितियां प्रस्तुत की हैं.'
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अदालत ने क्यों खारिज की पत्नी की गुजारा भत्ते की मांग
तथ्यों के मुताबिक, पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक- डॉक्टर वेद प्रकाश सिंह पूर्व में गुजारा भत्ता देने में सक्षम थे. हालांकि, उनके साले और ससुर ने क्लिनिक में एक झगड़े के दौरान उन्हें गोली मार दी जिसमें एक गोली उनकी रीढ़ में फंसी रह गई. गोली निकालने के लिए जरूरी सर्जरी से उन्हें लकवा मारने का अत्यधिक जोखिम था. वह आराम से बैठने में असमर्थ हो गए. कुशीनगर की परिवार अदालत ने सात मई, 2025 को अंतरिम गुजारा भत्ता के लिए पत्नी का आवेदन खारिज कर दिया.
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि पति की शारीरिक अक्षमता को लेकर कोई विवाद नहीं है और इसकी वजह उसकी पत्नी के परिवार वाले हैं. ऐसे में पति पर गुजारा भत्ता देने बोझ थोपना जायज नहीं है. इसलिए पत्नी की मांग को नहीं माना जा सकता है.














