उत्तर प्रदेश पुलिस का अजब गजब खेल सामने आया है. हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश देवीपाटन मंडल रेंज की जहां पर पुलिस द्वारा एक्सीडेंट में विवेचना में गाड़ियों व बिना लाइसेंस के ड्राइवरों को बदलने का खेल चल रहा है. दरोगा व एसआई द्वारा मुकदमे में रिश्वत लेकर एक्सीडेंट के समय बिना इंश्योरेंस गाड़ियों को बदलकर उसके जगह इंश्योरेंस वाली गाड़ियां दिखाकर, तो वहीं बिना लाइसेंस के ड्राइवर की जगह दूसरे लाइसेंस धारी ड्राइवर को दिखाकर बीमा कंपनियों को चुना लगाने का खेल चल रहा था. इसका खुलासा देवीपाटन आईजी रेंज अमित पाठक जांच में हुआ. वहीं पूरे मामले में आईजी ने कार्रवाई करते हुए गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती, बहराइच के एक इंस्पेक्टर, 12 सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर सभी लोगों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं.
पुलिस विवेचना के नाम पर रिश्वतखोरी
बता दें कि देवीपाटन मंडल के चारों जिलों गोंडा, बलरामपुर बहराइच व श्रावस्ती जिलों में इन दिनों पुलिस का खेल ही निराला चल रहा था. जहां पर पुलिस विवेचना के नाम पर रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था. इसका खुलासा तब हुआ जब इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा आईजी देवीपाटन रेंज अमित पाठक से पिछले दिनों हमको शिकायत मिली कि उन एक्सीडेंट्स के केसेज में जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है. जो विवेचक हैं उनके द्वारा अनियमितता करते हुए जिन गाड़ियों से एक्सीडेंट हुआ. उन गाड़ियों को परिवर्तित किया गया व जिन चालकों से एक्सीडेंट किया गया उनका भी नाम बदल के दूसरे चालकों को प्रकाश में लाया गया है.
इंश्योरेंस कंपनी से वसूल रहे थे पैसे
ऐसा इसलिए किया गया ताकि जो इंश्योरेंस कंपनी थी उससे क्लेम की धनराशि वसूली की जा सके. यदि किसी ऐसे प्रकरण में जिसमें वाहन बीमित नहीं होता है या फिर जो चालक होता है. उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता है. उसके द्वारा एक्सीडेंट कारित किया जाता है तो ये क्षतिपूर्ति संबंधित व्यक्ति से किए जाने का प्रावधान है. कई विवेचनाओं में इनके द्वारा फर्जी तरीके से ऐसे वाहनों को प्रकाश में लाया गया जिनके द्वारा घटना नहीं की गयी थी.
अग्रिम विवेचना के आदेश
जब इस सबकी अलग-अलग जनपदों में जांच करायी गयी तो ऐसे 13 प्रकरण निकलकर आये जिसमें 16 विवेचकों द्वारा ये अनियमितताएं की गयी थीं. उसके आधार पर इस समय एक निरीक्षक व 12 उपनिरीक्षकों को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रचलित की गई है. तीन अन्य उप-निरीक्षक जिनका स्थानांतरण हो चुका उनके ख़िलाफ़ संबंधित जनपद को सूचना भेजकर निलंबन व विभागीय कार्रवाई की प्रोसेस को हम लोगों ने आगे बढ़ाया है. इन सभी विवेचनाओं में सही विवेचना करके सही वाहन व सही वाहन चालक को उत्तरदायी बनाने के लिए अग्रिम विवेचना के आदेश दिए गए हैं.
आईजी अमित पाठक ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि कई मामले में शिकायत मिल रही कि पुलिस के द्वारा एक्सीडेंट में बिना इंश्योरेंस की गाड़ियों की विवेचना के दौरान दूसरी गाड़ी जो इंश्योरेंस होती उसको दिखा दिया जाता है, इसके साथ एक्सीडेंट में बिना वाहन लाइसेंस के ड्राइवरों दुर्घटना होती उनके जगह वैध लाइसेंस वाले ड्राइवरों दिखाकर पुलिस इंश्योरेंस कंपनियों को चूना लगाकर उनसे हर्जाना पीड़ित दिलाया जाता इसके लिए पुलिस के द्वारा विवेचना इस तरह खेल के नाम पर रुपये वसूली खेल चल रहा था.
एसआईटी बनाकर पूरे मामले की जांच
आईजी द्वारा भ्रष्टाचार रोकने को लेकर के एक एसआईटी बना करके पूरे मामले को लेकर के जांच कराई गई थी. जहां इस जांच में सबसे ज्यादा बहराइच के 8 लोग पुलिसकर्मी दोषी मिले हैं तो वहीं गोंडा के 2 और श्रावस्ती के 3 पुलिसकर्मी भी दोषी मिले हैं. सभी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच का आदेश दिया गया है, आगे जी दोषी मिलेंगे उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही की जाएगी.
देवीपाटन रेंज के आईजी अमित पाठक का कहना है कि हमें ऑफिस में ऐसी शिकायतें मिलीं कि दुर्घटना के जिन मामलों में किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई थी, उनकी जांच के दौरान जांच अधिकारियों (investigating officers) ने कई अनियमितताएं बरतीं. उन्होंने उन वाहनों को बदल दिया या उस व्यक्ति को बदल दिया जिसने दुर्घटना की थी. ऐसा बीमा कंपनी (insurance company) से पैसा हड़पने के उद्देश्य से किया गया था.
कुल 16 जांच अधिकारी शामिल
यदि किसी वाहन का बीमा नहीं है या दुर्घटना करने वाले व्यक्ति के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, तो बीमा कंपनी की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है..ऐसे 13 मामलों में हमने 16 जांच अधिकारियों को चिन्हित किया है, जिन्होंने जांच में ये अनियमितताएं कीं. इन 16 में से 13 कर्मियों को आज निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है. बाकी बचे 3 अधिकारियों का स्थानांतरण हो चुका है, इसलिए संबंधित जनपदों को पत्र लिखकर उनके निलंबन और विभागीय कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है. जिन मामलों में गड़बड़ियाँ पाई गई हैं, उनमें हमारे स्तर से अग्रिम जांच के आदेश दे दिए गए हैं. इन 13 मामलों में 2 मामले जनपद श्रावस्ती के हैं. 2 मामले जनपद गोंडा के हैं. 9 मामले जनपद बहराइच के हैं।इसमें कुल 16 जाँच अधिकारी शामिल हैं.
इनपुट: अनुराग कुमार सिंह














