'सरेंडर किया तो एनकाउंटर क्यों'? गाजीपुर में कमलेश बिंद एनकाउंटर केस गर्माया, UP के मंत्री संजय निषाद ने दी पुलिस को चुनौती

कमलेश बिंद एनकाउंटर से उत्तर प्रदेश की गाजीपुर पुलिस पर सवाल उठ गए हैं, जो खुद सरकार में मंत्री संजय निषाद ने उठाए हैं. उन्होंने पुलिस को खुली चुनौती देकर 5 सवाल पूछे हैं.

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गाजीपुर में कमलेश बिंद एनकाउंटर पर मंत्री संजय निषाद ने उठाए सवाल.

गाजीपुर में कमलेश बिंद एनकाउंटर केस गर्माया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने पुलिस को चुनौती दे दी है. उन्होंने कहा कि एनकाउंटर करना था तो मुख्य आरोपी का करना चाहिए था, कमलेश बिंद उस मामले में मुख्य आरोपी नहीं था. 

मंत्री संजय निषाद कहा- अपराधी की कोई जाति नहीं होती, यदि कमलेश बिंद ने कोई अपराध किया था, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा मिलनी चाहिए थी. क्योंकि विनीत राय हत्याकांड में कमलेश बिंद कहीं से भी मुख्य आरोपी नहीं था, यदि एनकाउंटर करना ही था, तो मुख्य आरोपियों का किया जाना चाहिए था. मैं गाजीपुर पुलिस की इस कार्रवाई से पूर्णतः असंतुष्ट हूं. गाजीपुर पुलिस और वहां के पुलिस कप्तान को चुनौती देता हूं कि अगर आपकी पुलिसिया कार्रवाई सही है, तो दोनों मुख्य आरोपियों का एनकाउंटर करके दिखाइए. मुझे पता है कि आप ऐसा कर ही नहीं सकते. 

मंत्री संजय निषाद के वो सवाल, जिनके गाजीपुर पुलिस से मांगे जवाब  

1. एनकाउंटर किन परिस्थितियों में किया गया? जब कमलेश बिंद की पत्नी स्वयं यह कह रही है कि उसके सामने उसके पति को थाने में मारा-पीटा गया और उसके बाद ले जाकर एनकाउंटर कर दिया गया, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?
2. भारतीय न्याय संहिता और संविधान में आरोपी को न्यायालय में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का प्रावधान है. अब तो पुलिस न्यायालय के गेट और न्यायालय परिसर के भीतर से ही गिरफ्तार कर लेती है. यह मौलिक अधिकारों का हनन है?
3. जब आप जानते थे कि एनकाउंटर के बाद समाज में रोष का माहौल बन सकता है, तो आपकी एलआईयू क्या कर रही थी.  आपको यह सूचना क्यों नहीं मिली कि परिजन या सामाजिक लोग विरोध कर सकते हैं?
4. मृतक के शव को ले जाते समय पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
5. आपका बयान है कि आप सभी पर रासुका लगाएंगे, तो मैं कहता हूं कि सबसे पहले डॉ. संजय निषाद पर रासुका लगाकर दिखाइए? 

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निषाद समाज का अपना इतिहास  

मंत्री संजय निषाद ने कहा- गाजीपुर पुलिस को यह ध्यान रखना चाहिए कि गाजीपुर में निषाद समाज का इतिहास सभी के सामने है. आप काले कानून की भांति यह कह रहे हैं कि रासुका लगाएंगे. क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के समय भी अंग्रेजों ने हमारे समाज के साथ ऐसा ही अन्याय किया था और आज आप वही कर रहे हैं. अगर रासुका लगानी है, तो हम आपको चुनौती देते हैं कि उत्तर प्रदेश की जेलें छोटी पड़ जाएंगी. लगाइए, आप कितनी रासुका लगाएंगे?

'हम आपसे पूछना चाहते हैं कि आपके कार्यकाल के दौरान, जब आप गाजीपुर और जालौन में कप्तान थे, तब पथराव की कितनी घटनाओं में रासुका लगाई गई थी? हाल ही में विश्वकर्मा मामले में पुलिस पर पथराव हुआ था, तब आपने रासुका क्यों नहीं लगाई? क्या केवल इसलिए कि हम निषाद-बिंद समाज से हैं, आप कार्रवाई करेंगे? यह अन्याय हम नहीं सहेंगे. आवश्यकता पड़ी तो मैं स्वयं आपके विरोध में न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगा' 

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सीएम योगी से सामने रखूंगा मामला  

संजय निषाद ने कहा- हम सरकार के साथ अपने समाज की रक्षा के लिए खड़े हैं, लेकिन यदि आप रक्षक के बजाय भक्षक बनकर कार्रवाई करेंगे, तो हमें इस विषय पर विचार करना होगा. इस बात को मैं स्वयं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के समक्ष रखूंगा और जहां तक मुझे इसके संबंध में सूचना देनी होगी, मैं वह देने का कार्य करूंगा. 

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चुनावी साल में सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहे अधिकारी 

उन्होंने कहा- मैं खुद फर्जी मुकदमों और पुलिस प्रताड़ना का भुक्तभोगी रहा हूं। 07 जून 2015 को (कल ही के दिन वर्ष 2015 में) कसरवल आंदोलन के दौरान समाजवादी पार्टी की सरकार ने जिस प्रकार मासूम और निहत्थे लोगों पर गोली चलाई थी और हमारा एक भाई पुलिस की गोली से शहीद हो गया था, उस घटना में मुझ पर सपा सरकार द्वारा धारा 302 का फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया था. जब मैं जेल में था, तब मेरी मुलाकात कई ऐसे पुलिसकर्मियों से हुई, जो किसी मानसिकता से प्रेरित होकर एनकाउंटर कर देते थे और बाद में न्यायालय से सजा मिलने के पश्चात उन्हें जेल में जीवन बिताना पड़ता था.

मेरा स्पष्ट मानना है कि ऐसे अधिकारियों की जांच होनी चाहिए, क्योंकि वे बेवजह सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहे हैं. चुनावी वर्ष में आप सरकार के एक सहयोगी दल के समाज को नाराज कर रहे हैं, जिससे चुनाव में नुकसान होना तय है. 
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