- आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव राजभर की जयंती पर दो कैबिनेट मंत्री अलग-अलग रैलियां कर रहे हैं
- अनिल राजभर ने कार्यक्रम को राजनीतिक टकराव से अलग बताते हुए सभी का समर्पण और एकजुटता की बात कही
- ओम प्रकाश राजभर ने अपने संगठन के साथ सपा का किला तोड़ने और भाजपा के पक्ष में जनता को लाने का दावा किया
यूपी के दो कैबिनेट मंत्री आज सामने सामने आने वाले हैं. आज़मगढ़ में आज एक नहीं बल्कि दो राजभर नेता अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. महाराजा सुहेलदेव राजभर की जयंती के मौके पर एक तरफ सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर महारैली की तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर भी रैली कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. अनिल राजभर का कहना है सुहेलदेव राजभर की जयंती का कार्यक्रम है सबका आवाहन किया है इसमें राजनीति नहीं देखनी चाहिए.
टिप्पणियों से बचते दिखे अनिल राजभर
अनिल राजभर ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र के नाम पर सब कुछ छोड़कर समर्पित होना चाहिए. राजा सुहेलदेव प्रेरणा देते हैं. जहां देश की बात हो, परंपराओं की बात हो, अपनी संस्कृति की बात हो, सब कुछ भूल देश के लिए खड़ा होना चाहिए. जान की परवाह नहीं करना चाहिए. कार्यक्रम का उद्देश्य भी वही है. उन्होंने कहा कि सुहेलदेव राजभर की जयंती का कार्यक्रम है. कोई राजनीतिक टकराव नहीं है. ओमप्रकाश राजभर की अपनी पार्टी ,अपना दल. अपना संगठन है. हमें कोई एतराज नहीं है. अनिल राजभर ने आगे कहा कि हम अकेले नहीं हैं. जनता हमारे साथ है,हमारे घर का कोई आदमी राजनीति में नहीं है. सब भाई-बहन हमारा परिवार हैं. इन्हीं के साथ और सहयोग से हम राजनीति में हैं.
अनिल राजभर ने कहा कि उनके समर्थक राजभर को सबसे बड़ा नेता मानते हैं. यह उनके समर्थकों का बड़प्पन है. ओम प्रकाश राजभर ने अपने कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं दिया. उन्हें जानकारी थी कि हमारा कार्यक्रम है. उन्होंने आगे कहा कि आजमगढ़ का प्रभारी मंत्री भी हूं. इस बार सपा का किला हटा देंगे. यहां की जनता मन बन चुकी है. उत्तर प्रदेश का जो विकास हो रहा है,जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का अभाव है. जनता को खटक रहा है, जनता भाजपा के साथ चलना चाहती है. भाजपा की उम्मीदवारों को जीताना चाहती है.ब्राह्मणों का कोई टकराव नहीं है. मनगढ़ंत नॉरेटिव है,इन सब बातों का कोई अर्थ नहीं है.
ओमप्रकाश राजभर का भी कुछ किलोमीटर पर कार्यक्रम हो रहा है. खुद पर हो रहे लगातार हमलों पर अनिल राजभर ने कहा कि वह अकेले नहीं हैं. जनता का समर्थन उन्हें मिला हुआ है. ओमप्रकाश राजभर के परिवारवाद को निशाने पर लेते हुए अनिल राजभर ने कहा कि उनके परिवार का कोई आदमी राजनीति में नहीं है. समाज का भाई-बहन ही उनका परिवार है और उनके सहयोग से वो राजनीति करते हैं. 27 के चुनाव पर ललकारते हुए राजभर ने कहा कि आजमगढ़ जहां पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने परफेक्ट स्ट्राइक रेट से जीत दर्ज की थी इस बार वहां की जनता ने मन बना लिया है. जिम्मेदार प्रतिनिधियों का अभाव है, जनता आजमगढ़ की भाजपा के साथ चलना चाहती है. भाजपा की उम्मीदवारों को जिताना चाहती है. ओमप्रकाश राजभर के कार्यक्रमों में ब्राह्मण वर्ग प्रबुद्ध वर्ग के आने पर अनिल राजभर ने कहा कि प्रबुद्ध वर्ग समझदार हैं, माहौल बनाने की जो कोशिश है.27 में वह मुद्दा नहीं रहेगा, ब्राह्मणों से कोई टकराव नहीं है, यह गलत नॉरेटिव है और इसका कोई अर्थ नहीं है.
आजमगढ़ में ही रैली क्यों?
आजमगढ़ में रैली करने की घोषणा ओम प्रकाश राजभर ने की थी.इस कार्यक्रम में पहले सीएम योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया गया था,लेकिन विदेश दौरे की वजह से सीएम नहीं आ सके.ओम प्रकाश राजभर मऊ, गाजीपुर और बलिया में मजबूत माने जाते हैं और अपना प्रभाव आज़मगढ़ में बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए इस रैली के लिए वो महीनों से इसकी तैयारी में लगे थे.इस रैली की घोषणा के बाद अनिल राजभर ने भी रैली की जगह आजमगढ़ को चुन लिया.
इन नेताओं की अदावत पुरानी है
ओम प्रकाश राजभर और अनिल राजभर एक ही समाज से आते हैं, लेकिन दोनों में 36 का आंकड़ा है, दोनों खुलकर एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी करते रहे हैं. हाल ही में अनिल राजभर में भरे मंच से कहा ओम प्रकाश को चोर बताते हुए समाज को बेचने का आरोप लगाया. जवाब में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अनिल राजभर की मां ने दूध पिलाया हो तो वो बतायें कि किस दुकान में वोट बिकता है.














