गौ माता को ‘राज्य माता’ घोषित करो, नहीं तो... शंकराचार्य का योगी सरकार को अल्टीमेटम

वाराणसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए गौ संरक्षण के मुद्दे पर उन्हें खुली चुनौती दी.

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  • शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार से गौ संरक्षण के मुद्दे पर जवाबदेही की मांग की है
  • उन्होंने उत्तर प्रदेश में गौ हत्या बढ़ने का आरोप लगाते हुए सरकार के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं
  • शंकराचार्य ने कहा कि 1 मार्च तक गौ माता को राज्य माता का दर्जा न देने पर आंदोलन करेंगे
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वाराणसी:

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने गौ संरक्षण के मुद्दे पर खुली चुनौती दी है. शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अपने समर्थकों के साथ लखनऊ की ओर प्रस्थान करेंगे.

20 दिन का समय शेष, 1 मार्च को अगली रणनीति

शंकराचार्य ने याद दिलाया कि उन्होंने सरकार को 40 दिन का समय दिया था, जिसमें से अब केवल 20 दिन शेष बचे हैं. उन्होंने कहा, "हम सरकार को याद दिला रहे हैं कि गौ माता को 'राज्य माता' का दर्जा देने के लिए समय कम बचा है. 1 मार्च को हम दोबारा पत्रकारों से मिलेंगे और आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे."

यूपी में बढ़ी गौ-हत्या? आंकड़ों पर उठाए सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पशु गणना का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए. उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गायों के कटने की संख्या बढ़ी है, जबकि बंगाल जैसे राज्यों में यह कम हुई है. उन्होंने कहा कि बंगाल में उनके प्रयासों से पशु मेलों पर रोक लगी है और वहां गायों की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. शंकराचार्य ने कहा कि चूंकि योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व की बात करते हैं और यूपी में संख्या बल अधिक है, इसलिए वे पहले यहां जवाबदेही तय कर रहे हैं.

"गेरुआ पहनकर मांस का व्यापार बर्दाश्त नहीं"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा प्रहार करते हुए शंकराचार्य ने गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जो लोग गेरुआ वस्त्र पहनकर गौ मांस के व्यापार का समर्थन कर रहे हैं या चुप हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "योगी आदित्यनाथ अहंकार ग्रस्त हो गए हैं. सदन की आड़ लेकर शंकराचार्य की गरिमा पर सवाल उठाना ठीक नहीं है. जनता के बीच आकर बात करें. भाजपा को भी अब लगने लगा है कि उन्होंने भस्मासुर पाल लिया है."

 
धर्माचार्यों और महामंडलेश्वरों को चुनौती

शंकराचार्य ने न केवल मुख्यमंत्री बल्कि अन्य धर्माचार्यों को भी घेरे में लिया. उन्होंने सवाल उठाया कि विरक्त (संन्यासी) होकर कोई वेतनभोगी पद पर कैसे कार्य कर सकता है? धर्मशास्त्र उनके इस आचरण का समर्थन कैसे करते हैं? जो धर्माचार्य सीएम योगी के पक्ष में रहेंगे, उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाएगा जैसा मुख्यमंत्री के साथ होगा.

11 मार्च को लखनऊ कूच का आह्वान

शंकराचार्य ने अपने भक्तों और गौ-भक्तों से तैयार रहने की अपील की है. उन्होंने घोषणा की कि 11 मार्च को वे लखनऊ जाने की रणनीति का खुलासा करेंगे. उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे अभी से छुट्टियां लेना और तैयारी करना शुरू कर दें, क्योंकि अब धर्म की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने का समय आ गया है. 
 

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